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'बड़ा दिल' दिखाएगी कांग्रेस, NCP को ऑफर करेगी राज्यसभा के उपसभापति का पद?

कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि पार्टी के लिए यह दिखाना महत्वपूर्ण है कि उसका 'दिल बड़ा' है, और 2019 के लोकसभा चुनाव तक विपक्ष को एकजुट रखना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि उपसभापति के पद को हमारे सहयोगी स्वीकार करें.'

सोनिया गांधी और शरद पवार (फाइल फोटो) सोनिया गांधी और शरद पवार (फाइल फोटो)

संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई यानी बुधवार से शुरू हो रहा है और इस बार सबकी नजरें राज्यसभा के उपसभापति के लिए होने वाले चुनाव पर होंगी. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस पद पर अपने उम्मीदवार को देखना चाहती हैं, लेकिन सीटों का गणित ऐसा है कि इनमें से कोई भी अपने दम पर किसी उम्मीदवार को जिताने में सक्षम नहीं है.

ऐसे में एनडीए और यूपीए में इन बड़ी पार्टियों के सहयोगी दलों ने भी इस पद पर अपनी निगाहें गड़ा दी हैं. अब तक बड़ी पार्टियों ने भी इस मामले में बड़ा दिल दिखाने का संकेत दिया है. खबर है कि कांग्रेस एनसीपी यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को ये पद ऑफर कर सकती है.

पद की रेस में एनसीपी

राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल 1 जुलाई को खत्म हो गया और महज चंद दिनों में मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है. लिहाजा नए उपसभापति को लेकर राजनीतिक गुणा-गणित का खेल शुरू हो चुका है. कांग्रेस की तरफ से संकेत मिल रहे हैं कि वह अपना उम्मीदवार तो नहीं उतारेगी, पर एनसीपी को उपसभापति के पद का प्रस्ताव दे सकती है.

इस प्रस्ताव पर विपक्षी दलों की होने वाली रणनीतिक बैठक में चर्चा हो सकती है. दरअसल कांग्रेस दिखाना चाहती है कि उसका 'दिल बड़ा' है. 2019 के लोकसभा चुनाव तक उसके लिए विपक्ष को एकजुट रखना जरूरी है इसीलिए पार्टी चाहती है कि उपसभापति का पद वो किसी सहयोगी दल को ऑफर करे और इसमें एनसीपी उसे सबसे मुफीद लगती है.

गौरतलब है कि एनसीपी कांग्रेस की पुरानी सहयोगी है. दोनों मिलकर केंद्र और महाराष्ट्र में सरकार चला चुके हैं. 2014 के विधानसभा चुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ीं, जिसका नतीजा ये हुआ कि उनके हाथ से सत्ता चली गई. पिछले लोकसभा चुनाव में एनसीपी कम सीटें लड़कर भी कांग्रेस से अधिक सीटें जीतने में सफल रही थी. कांग्रेस 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ दो सीटें जीत सकी, जबकि एनसीपी 21 सीटें लड़कर चार सीटें जीतने में सफल रही.

वैसे कांग्रेस के एनसीपी को उपसभापति की सीट देने के पीछे एक कारण और है. बताया जाता है कि यूपीए के उसके सहयोगी व अन्य क्षेत्रीय दलों ने उससे साफ कह दिया है कि वे कांग्रेस को जिताने के लिए नहीं बल्कि बीजेपी को हराने के लिए एक मंच पर आना चाहते हैं.

कांग्रेस के लिए चुनौती

ऐसे में कांग्रेस के पास सीमित विकल्प हैं. या तो वो ममता बनर्जी की टीएमसी को इस मामले में सपोर्ट करे जिनका कांग्रेस के साथ काम करने को लेकर कोई अच्छा रिकॉर्ड नहीं रहा है. वो यूपीए-2 की सरकार से बीच में ही समर्थन वापस ले चुकी थीं. साथ ही पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस बनर्जी की बजाय उनकी विरोधी लेफ्ट पार्टियों की सहयोगी रही थी.

खुद ममता अभी तक महागठबंधन या फेडरल फ्रंट के बीच झूल रही हैं और राहुल गांधी के पीएम पद के उम्मीदवार होने पर भी उनका रुख अब तक साफ नहीं है. ऐसे में कांग्रेस को दूसरा विकल्प ज्यादा मुफीद लग रहा है जिसके तहत एनसीपी जैसे अपेक्षाकृत ज्यादा वफादार दल को उपसभापति पद ऑफर करना है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एनसीपी के एक नेता ने स्वीकार किया है कि कांग्रेस ने अनौपचारिक रूप से इस सिलसिले में पार्टी से बात की है. लेकिन अभी इस सिलसिले में कुछ ठोस प्रस्ताव सामने नहीं आया है. इस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के बीच सेतु का काम करना चाहती है. 'कांग्रेस तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के बजाय हमारे साथ ज्यादा सहज महसूस करेगी, अन्य छोटी पार्टियां भी कांग्रेस की तुलना में एनसीपी से ज्यादा सहज रहेंगी.'

बता दें कि सोमवार को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक की अध्यक्षता राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद करेंगे. इसमें  मॉनसून सत्र को लेकर विपक्ष की रणनीति तैयार की जाएगी. बैठक में टीडीपी ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन को लेकर भी कोई फैसला हो सकता है.

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