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आ रही है ग्लास की छत औऱ खिड़कियों वाली ट्रेन

भारतीय रेल नई-नई खोजों पर काम कर रही है और यात्रियों को कई नई सौगात दे रही है. अब वह कुछ खास रूटों पर ऐसे डिब्बों वाली रेल चलाने की तैयारी में है जिनकी छतें और खिड़कियां ग्लास की हैं. ये इसलिए ग्लास के बने हैं ताकि यात्री चारों ओर का नजा़रा देख सकें.

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भारतीय रेल नई-नई खोजों पर काम कर रही है और यात्रियों को कई नई सौगात दे रही है. अब वह कुछ खास रूटों पर ऐसे डिब्बों वाली रेल चलाने की तैयारी में है जिनकी छतें और खिड़कियां ग्लास की हैं. ये इसलिए ग्लास के बने हैं ताकि यात्री चारों ओर का नजा़रा देख सकें. यह खबर एक अंग्रेजी अखबार ने दी है.

दरअसल देश में रेलगाड़ियां कई ऐसे मार्गों से गुजरती हैं जो बहुत सुंदर हैं. वहां आस-पास प्रकृति अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में दिखती है. नदियां, पहाड़, झरने वगैरह कई तरह के आकर्षण वहां हैं. रेलवे चाहती है कि यात्री इन्हें निहारें और इनकी सुंदरता का लुत्फ उठाएं. इसलिए उसने फैसला किया कि ऐसे कोच बनाए जाएं जिनसे यात्रियों को अपनी सीट पर बैठे-बैठे प्रकृति की सुंदरता दिखे. ऐसे कोच स्विट्ज़रलैंड और कनाडा की कुछ खूबसूरत इलाकों में रेलगाड़ियों में होते हैं.

इसके लिए सबसे पहले आन्ध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम और अराकू के बीच चलने वाली ट्रेन को चुना गया है. यहां घने जंगल, नदियां और कॉफी कै बागान हैं. इस ट्रेन के दो कोच की छत और खिड़कियां खास किस्म की ग्लास से बनी हैं जो टूटती नहीं हैं. ये कोच पर्यटन मंत्रालय की पहल पर बनवाए गए हैं. यह खास ट्रेन मार्च 2015 के बाद चलनी शुरू हो जाएगी. कश्मीर घाटी के बारामूला और क़ाज़ीगुंड के मार्ग पर भी इस तरह के कोच लगाने की बात हो रही है. पर्यटन मंत्रालय इस तरह के कोच के लिए 4 करोड़ रुपए खर्च कर रही है. स इन डिब्बों में यात्रा करने के लिए महज 5 प्रतिशत अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा.

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