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दसॉल्ट का पहला विदेशी ग्राहक था भारत, नेहरू ने खरीदे थे 'तूफानी' विमान

दसॉल्ट कंपनी के सीईओ एरिक ट्रैपियर के इंटरव्यू से एक बार फिर राफेल विवाद चर्चा में है. उन्होंने अपने इंटरव्यू में भारत-दसॉल्ट के संबंधों के बारे में बताया.

दसॉल्ट की वेबसाइट dassault-aviation.com की तस्वीर दसॉल्ट की वेबसाइट dassault-aviation.com की तस्वीर

बहुचर्चित राफेल विमान डील पर देश में जारी राजनीतिक घमासान के बीच फ्रांस की दसॉल्ट कंपनी के सीईओ के इंटरव्यू से मामले ने फिर तूल पकड़ा है.

दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने समाचार एजेंसी ANI को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का जवाब दिया.

अपने इंटरव्यू के दौरान उन्होंने भारत के साथ साझेदारी पर जोर दिया. ट्रैपियर ने बताया कि भारत के साथ उनकी साझेदारी 1953 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की अगुवाई में भारत-दसॉल्ट के बीच करार हुआ था.

दसॉल्ट एविएशन की आधिकारिक वेबसाइट (www.dassault-aviation.com) के मुताबिक, भारत और दसॉल्ट एविएशन के बीच 1953 में करार हुआ था. वेबसाइट के मुताबिक, 1953 में भारत ही कंपनी का पहला एक्सपोर्ट कस्टमर ( विदेशी कस्टमर) बना था. ( नीचे फोटो- दसॉल्ट की वेबसाइट से लिया गया है)

इतिहास को खंगाले तो आपको मालूम पड़ेगा कि भारत ने 1953 में फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन से 71 Ouragan विमान खरीदे थे. भारत ने इस विमान का नाम तूफानी रखा था. ये विमान भारत को इतना पसंद आया कि दोबारा 113 विमानों का नया ऑर्डर गया था.

CEO ने दिया हर सवाल का जवाब

आपको बता दें कि फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने समाचार एजेंसी ANI को दिए गए इंटरव्यू में इस डील पर उठ रहे हर एक सवाल का जवाब दिया. इस इंटरव्यू में उन्होंने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए हर आरोप को झूठा करार दिया.

एरिक ट्रैपियर ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बिल्कुल निराधार हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने दसॉल्ट और रिलायंस के बीच हुए ज्वाइंट वेंचर (JV) के बारे में सरासर झूठ बोला है. उन्होंने कहा कि डील के बारे में जो भी जानकारी दी गई है वह बिल्कुल सही है, क्योंकि वे झूठ नहीं बोलते हैं.

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