हाल में भारत के प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल पीएमओ इंडिया (@PMOIndia) को लेकर सियासी गलियारों में बवाल मचा. जब यह विवाद चल रहा था, उसी दौरान इस हैंडल को लखनऊ के एक युवक ने अनजाने में हासिल कर लिया था. 19 साल के कैसर अली का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि ये सब कैसे हो गया. कैसर अपने ट्विटर हैंडल को केवल एक अच्छा नाम देना चाहते थे.
'बीबीसी' की एक रिपोर्ट के मुताबिक कैसर को यह नहीं पता कि उनके मन में यह खयाल कैसे आया लेकिन उन्होंने पीएमओ इंडिया की उपलब्धता चेक की तो यह उन्हें मिल गया और इसे अपने लिए सुरक्षित कर लिया.'
हालांकि, कैसर अली के पास ये अकाउंट ज्यादा देर तक नहीं रह सका. बिना किसी स्पष्टीकरण के उसके खाते को आधे घंटे के भीतर ही पुराने नाम में बदल दिया गया. कैसर का कहना है कि वो चौंक गए थे, सम्मानित महसूस कर रहे थे लेकिन डरे हुए भी थे. उन्होंने कहा, 'मैं महज 19 साल का एक युवा हूं और ये सरकारी मामला है. जब मेरे परिजनों को पता चला तो उन्होंने मुझे डांटा और देश की जनता से माफी मांगने के लिए कहा."
कैसर ने ट्विटर पर तुरंत माफी मांगते हुए कहा, "पीएमओ इंडिया नाम लेने के लिए मैं माफी मांगता हूं. मैंने ऐसा किया क्योंकि यह उपलब्ध था."
क्या है हैंडल विवाद?
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मनोनीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच इस ट्विटर हैंडल को लेकर विवाद चल रहा है. दरअसल, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने से पहले पीएमओ के ट्विटर अकाउंट का पता ‘@PMOIndia’ से बदलकर ‘@PMOIndiaArchive’ कर दिया गया. इससे ‘@PMOIndia’ पर डाली गई सारी सामग्री और 12.4 लाख फॉलोवर खुद ब खुद ‘@PMOIndiaArchive’ में आ गए. बीजेपी इस पर ने कहा कि मूल ट्विटर अकाउंट एक ‘‘राष्ट्रीय डिजिटल संपत्ति’’ है और वह मनमोहन सिंह का अकाउंट नहीं है. ऐसे में उस अकाउंट को नई सरकार को सौंप देना चाहिए था.
विवाद बढ़ने पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि उसका आधिकारिक ट्विटर एकाउंट माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट द्वारा ‘सुरक्षित रखा’ गया है और इसे अगले सप्ताह बागडोर संभाल रही नई सरकार को सुपुर्द किया जाएगा. पीएमओ की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक मनमोहन सिंह पर मौजूदा सामग्री अलग से ट्विटर पर एक नए एकाउंट पर उपलब्ध रहेगा.