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कभी कांग्रेस का अध्यक्ष तय करने में भी थी हेडगेवार की भूमिका, प्रणब ने बताया महान सपूत

नवंबर 2010 में कानपुर के मोतीझील पार्क में संघ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि संघ संस्थापक हेडगेवार बहुत अच्छे कांग्रेस कार्यकर्ता थे और उन्होंने कांग्रेस के कहने पर अंग्रेजों से लड़ने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों के साथ काम किया था. हेडगेवार कांग्रेस से जुड़े रहे. कांग्रेस के नेताओं के साथ उन्होंने शुरुआत से काम किया था. मध्यप्रांत में प्रांतीय कांग्रेस ने 'संकल्प' पत्रिका के प्रकाशन का निर्णय लिया तो इस पत्रिका के प्रसार आदि का जिम्मा हेडगेवार को दिया गया.

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RSS संस्थापक हेडगेवार( फाइल फोटो)
RSS संस्थापक हेडगेवार( फाइल फोटो)

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब  मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में होने वाले कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के लिए नागपुर में हैं. प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस के पासिंग आउट परेड में स्वयंसेवकों को संबोधित किया. इससे पहले उन्होंने आरएसस संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने हेडगेवार को मां भारती का महान सपूत बताया.

प्रणब मुखर्जी हेडगेवार के जन्म स्थान पहुंचे. यहं पर उन्होंने विजिटर बुक में लिखा- मां भारती के महान सपूत थे केशव बलिराम हेडगेवार.

बता दें कि हेडगेवार आरएसएस की स्थापना करने से पहले कांग्रेस से जुड़े हुए थे. डॉ. हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर के ब्राह्मण परिवार में हुआ था. जब वो महज 13 साल के थे तभी उनके पिता पंडित बलिराम पंत हेडगेवार और माता रेवतीबाई का निधन हो गया. उसके बाद उनकी परवरिश दोनों बड़े भाइयों महादेव पंत और सीताराम पंत ने की. शुरुआती पढ़ाई नागपुर के नील सिटी हाईस्कूल में हुई. लेकिन एक दिन स्कूल में वंदेमातरम गाने की वजह से उन्हें निष्कासित कर दिया गया. उसके बाद उनके भाइयों ने उन्हें पढ़ने के लिए यवतमाल और फिर पुणे भेजा. मैट्रिक के बाद हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी एस मूंजे ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेज दिया. यह बात 1910 की है. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 1915 में नागपुर लौट आए.

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1915 में कांग्रेस से जुड़े

डॉ. हेडगेवार 1910 में जब डॉक्टरी की पढाई के लिए कोलकाता गये तो उस समय वहां देश की नामी क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़ गये। 1915 में नागपुर लौटने पर वह कांग्रेस में सक्रिय हो गये और कुछ समय में विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव बन गये.

मोहन भागवत ने हेडगेवार को  बताया था अच्छा कांग्रेसी कार्यकर्ता

नवंबर 2010 में कानपुर के मोतीझील पार्क में संघ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि संघ संस्थापक हेडगेवार बहुत अच्छे कांग्रेस कार्यकर्ता थे और उन्होंने कांग्रेस के कहने पर अंग्रेजों से लड़ने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों के साथ काम किया था. हेडगेवार कांग्रेस से जुड़े रहे. कांग्रेस के नेताओं के साथ उन्होंने शुरुआत से काम किया था. मध्यप्रांत में प्रांतीय कांग्रेस ने 'संकल्प' पत्रिका के प्रकाशन का निर्णय लिया तो इस पत्रिका के प्रसार आदि का जिम्मा हेडगेवार को दिया गया.

असहयोग आंदोलन के दौरान निभाई थी अहम भूमिका

देश में अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन के दौरान भी डॉ. हेडगेवार ने अहम भूमिका निभाई थी. उस दौरान मराठी मध्य प्रांत की तरफ से डॉ. हेडगेवार की अगुवाई में बनाई गई असहयोग आंदोलन समिति ने कार्यकर्ताओं को आंदोलन के प्रति जागृत करने का काम किया. मराठी मध्यप्रांत में यह आंदोलन काफी सफल भी रहा था.

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वर्ष 1921 में आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेज हुकूमत ने दमन की नीति अपनाते हुए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करना शुरू किया. डॉ. हेडगेवार को भी अनेक मुकदमों में गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि जब वे जेल से बाहर निकले तब तक महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था.

कांग्रेस अध्यक्ष के लिए  डॉ. अरविंद घोष का नाम किया था प्रस्तावित

इस संबंध में व्यापक जानकारी नेहरू मेमोरियल एवं लाइब्रेरी में संग्रहित मुंजे पेपर्स में मिलती है. वर्ष 1920 में कांग्रेस का अधिवेशन नागपुर में होना तय हुआ था. कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुना जाना था. नागपुर कांग्रेस समिति के संयुक्त सचिव होने की हैसियत से डॉ. हेडगेवार ने डॉ. अरविंद घोष का नाम प्रस्तावित करने का विचार रखा, लेकिन अरविंद तब तक पॉन्डिचेरी में संन्यासी का जीवन अपना चुके थे. उन्होंने इस प्रस्ताव को नकार दिया.

नागपुर के इस कांग्रेस अधिवेशन के लिए बनाई गई स्वागत समिति में भी डॉ. हेडगेवार की महत्वपूर्ण भूमिका तय थी. इस अधिवेशन के समय हेडगेवार ने अध्यक्ष पद के लिए विजयराघवाचार्य के नाम का विरोध किया था, क्योंकि विजयराघवाचार्य असहयोग आंदोलन से पूर्ण सहमत नहीं थे और जलियावाला बाग हत्याकांड के समय वे मद्रास प्रांत के राज्यपाल के निमंत्रण पर चाय पार्टी में चले गए थे.

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1925 में 17 लोगों के साथ शुरू किया सफर

डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शुरुआत 1925 में 17 लोगों के साथ हेडगेवार निवास से की. कुछ समय बाद संघ के शाखा की शुरुआत नागपुर में हुए.

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