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PSE: गुजरात में रूपाणी, महाराष्ट्र में फडणवीस के स्टॉक ऊपर, गोवा में BJP के लिए खतरे की घंटी

गुजरात में अधिकतर लोग विजय रूपाणी को ही मुख्यमंत्री के पद पर बने रहते देखना चाहते हैं. वहीं राफेल डील के बारे में सर्वे में गुजरात के 68% प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में नहीं सुना.

गुजरात के सीएम विजय रूपाणी (फाइल फोटो) गुजरात के सीएम विजय रूपाणी (फाइल फोटो)

गुजरात विधानसभा चुनाव को नौ महीने बीतने के बाद राज्य में अधिकतर लोग विजय रूपाणी को ही मुख्यमंत्री के पद पर बने  रहते देखना चाहते हैं. लोकप्रियता के मामले में रूपाणी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल से कहीं आगे हैं. ये निष्कर्ष इंडिया टुडे पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज (PSE) के पांचवें संस्करण से निकल कर आया है.

बीजेपी के लिए ऐसी ही स्थिति महाराष्ट्र में है. महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लोकप्रियता के मामले में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और NCP नेता शरद पवार से काफी फासले से आगे हैं.

गोवा में ज़रूर बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है. गोवा में मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री के तौर पर बेशक वोटरों की पहली पसंद बने हुए हैं लेकिन उनकी सरकार के कामकाज को लेकर लोग नाखुश ज्यादा है और संतुष्ट कम.

राजनीतिक नब्ज़ को हर हफ्ते ट्रैक करने वाले देश के पहले कार्यक्रम PSE  की खास बातों में सामने आया है कि गुजरात में पाटीदार आंदोलन को लेकर अधिकतर लोगों की राय इस आंदोलन को आगे जारी रखने के पक्ष में नहीं है. वहीं महाराष्ट्र में ‘अर्बन नक्सल’ केस में पांच वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी से जुड़े राज्य पुलिस के फैसले को 31%प्रतिभागियों ने सही बताया है. सर्वे में 10% लोगों ने इस फैसले को ‘पुलिस की मनमानी’ और 21% ने ‘राजनीतिक फायदे के लिए’ उठाया गया कदम बताया.    

48 फीसदी वोटर की पसंद विजय रूपाणी

इंडिया टुडे-माई-इंडिया PSE सर्वे के मुताबिक 48 फीसदी वोटर विजय रूपाणी को ही राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभालते देखना चाहते हैं. लोकप्रियता के मामले में वो अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल से कहीं आगे हैं. शक्ति सिंह गोहिल को सिर्फ 11 फीसदी वोटरों ने ही मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया.  

विजय रूपाणी के नेतृत्व वाली मौजूदा BJP सरकार के कामकाज से गुजरात में 43 फीसदी वोटर संतुष्ट हैं. सर्वे के 27 फीसदी प्रतिभागियों ने ही रूपाणी सरकार के कामकाज से नाखुशी जताई. वहीं 26 फीसदी वोटरों ने इसे औसत बताया.

जहां तक केंद्र में मोदी सरकार के कामकाज का सवाल है तो गुजरात में 52 फीसदी वोटर इससे संतुष्ट हैं. गुजरात से सर्वे में सिर्फ 22 फीसदी प्रतिभागी मोदी सरकार के कामकाज से असंतुष्ट दिखे. वहीं राज्य से 23 फीसदी प्रतिभागियों ने मोदी सरकार के कामकाज को औसत माना.

प्रधानमंत्री के लिए 61 फीसदी लोगों की पसंद नरेंद्र मोदी  

सर्वे में गुजरात से 61 फीसदी प्रतिभागी नरेंद्र मोदी को फिर देश का प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं. वहीं राज्य से 28 फीसदी प्रतिभागियों ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया.  

सर्वे में राज्य के लोगों ने महंगाई को सबसे बड़ा मुद्दा बताया. इसके अलावा बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, नाला-नाली/साफ सफाई और पीने के पानी को अन्य अहम मुद्दों के तौर पर प्रतिभागियों ने गिनाया.

गुजरात में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पाटीदार आंदोलन बड़ा मुद्दा था. पाटीदारों (पटेलों) के लिए आरक्षण की मांग करने वाले और आंदोलन की अगुआई करने वाले युवा नेता हार्दिक पटेल ने उस चुनाव में कांग्रेस को समर्थन दिया था. PSE सर्वे में पाटीदार आंदोलन को लेकर सवाल पर 44% लोगों ने कहा कि इसे अब आगे जारी नहीं रखना चाहिए. वहीं 34%  ने कहा कि पाटीदार आंदोलन को आगे भी जारी रखना चाहिए. 22% प्रतिभागी ऐसे भी थे जो इस सवाल पर कोई स्पष्ट  राय नहीं जता सके.   

पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों के बारे में पूछे जाने पर सर्वे में 81% प्रतिभागी इस पक्ष में दिखे कि केंद्र सरकार को टैक्स कम करके लोगों को दामों में राहत देनी चाहिए. हालांकि 13 फीसदी प्रतिभागियों ने ये राय भी जताई कि केंद्र सरकार को पेट्रोल उत्पादों पर टैक्स नहीं घटाना चाहिए. 6 फीसदी प्रतिभागी इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट राय नहीं जता सके.

68 फीसदी लोगों को नहीं पता राफेल डील के बारे में

राफेल डील के बारे में सर्वे में गुजरात के 68% प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में नहीं सुना. सिर्फ 32 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी है. गुजरात से सर्वे में हिस्सा लेने वाले 35% वोटरों की राय में राफेल डील में भ्रष्टाचार नहीं हुआ. वहीं 19% मानते हैं कि डील में भ्रष्टाचार हुआ. सर्वे में 46% प्रतिभागियों ने कहा कि वो इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कह सकते.

इंडिया टुडे-एक्सिस-माई-इंडिया सर्वे गुजरात के 26 संसदीय क्षेत्रों में लिए गए साक्षात्कारों पर आधारित है. गुजरात के लिए  PSE सर्वे में कुल 10,660 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. ये सर्वे 28 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच हुआ.

गुजरात में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में 182 सदस्यीय सदन में BJP को 99, कांग्रेस को 77, NCP को 1, BTP को 2 और निर्दलीयों को 3 सीटों पर कामयाबी मिली थी.

महाराष्ट्र में 39 फीसदी लोगों की पसंद देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के लिए देवेंद्र फडणवीस लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. चुनावी सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 39% फीसदी प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री के लिए पसंद के तौर पर फडणवीस को वोट दिया.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को 17 फीसदी वोटरों ने मुख्यमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया. लोकप्रियता के मामले में NCP नेता शरद पवार शिवसेना प्रमुख के लगभग बराबर ही हैं. 16 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि वो शरद पवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं.

PSE के निष्कर्षों के मुताबिक सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 37 फीसदी प्रतिभागी फडणवीस सरकार के कामकाज से संतुष्ट दिखे. वहीं 32 प्रतिशत ने फडणवीस सरकार के कामकाज पर नाखुशी जताई. वहीं 28 फीसदी प्रतिभागियों ने इसे औसत बताया.

कथित ‘अर्बन नक्सल’ केस में माओवादियों से संबंध रखने के आरोप में पांच वामंपथी विचारकों को गिरफ्तार करने संबंधी महाराष्ट्र पुलिस की कार्रवाई पर भी सर्वे में सवाल किया गया. सर्वे में प्रतिभागियों से पूछा गया कि गिरफ्तारी संबंधी महाराष्ट्र पुलिस के फैसले को आप कैसे देखते हैं. इस सवाल के जवाब में 31 फीसदी प्रतिभागियों ने महाराष्ट्र पुलिस की कार्रवाई को ‘सही’ माना.

वहीं 10 फीसदी ने इसे ‘पुलिस की मनमानी’ बताया. 21 फीसदी वोटरों ने पुलिस के फैसले को‘राजनीतिक फायदे के लिए’ उठाया गया कदम बताया. वहीं 38 फीसदी प्रतिभागी इस सवाल पर कोई स्पष्ट राय नहीं व्यक्त कर सके.  

 PSE सर्वे में महाराष्ट्र के अहम मुद्दों के बारे में प्रतिभागियों से पूछा गया तो उन्होंने सबसे बड़े मुद्दे के तौर पर ‘नाली-नाले औरसाफ-सफाई’ का नाम लिया. इसके बाद महंगाई, पीने का पानी, गांवों को जोड़ने वाली सड़कों की स्थिति, किसानों की समस्याएं और बेरोजगारी को अन्य अहम मुद्दों के तौर पर प्रतिभागियों ने गिनाया.

प्रधानमंत्री के लिए 47 फीसदी लोगों की पसंद नरेंद्र मोदी

सर्वे में जब देश के अगले प्रधानमंत्री के लिए पसंद के बारे में पूछा गया तो  राज्य से 47% प्रतिभागियों ने नरेंद्र मोदी के पक्ष में वोट दिया. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 31% प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया.

जहां तक केंद्र में मोदी सरकार के कामकाज का सवाल है तो महाराष्ट्र में सर्वे के 43 फीसदी प्रतिभागी इससे संतुष्ट दिखे. 31 फीसदी प्रतिभागियों ने मोदी सरकार के कामकाज पर नाखुशी जताई. वहीं 23 फीसदी प्रतिभागियों ने मोदी सरकार के कामकाज को औसत बताया.

पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों के बारे में पूछे जाने पर सर्वे में 89% प्रतिभागियों ने कहा कि केंद्र सरकार को टैक्स कम करके लोगों को पेट्रोल के दामों में राहत देनी चाहिए. वहीं 7 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि केंद्र सरकार को पेट्रोल पर टैक्स नहीं घटाने चाहिए.

राफेल डील के बारे में सर्वे में बिहार के 70 प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. सिर्फ 30 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी है. जिन्हें राफेल डील की जानकारी थी उनमे से 24 फीसदी प्रतिभागी इस राय के थे कि डील में भ्रष्टाचार नहीं हुआ. वहीं 18% ने कहा कि डील में भ्रष्टाचार हुआ है. जबकि 58% वोटरों ने कहा कि वे पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकते कि भ्रष्टाचार हुआ या नहीं हुआ.  

PSE सर्वे के लिए महाराष्ट्र के 48 संसदीय क्षेत्रों में 18,335 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के लिए 2014 में हुए चुनाव में BJP को 122, शिवसेना को 63, कांग्रेस को 42, NCP को 41, बहुजन विकास अगाड़ी और पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी को 3-3,AIMIM को 2 और निर्दलीयों को 7 सीटों पर कामयाबी मिली थी.  

गोवा में BJP के लिए खतरे की घंटी  

महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य गोवा में मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को PSE सर्वे में 36 फीसदी प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री के तौर पर पहली पसंद बताया. हालांकि उनकी सरकार के कामकाज को लेकर वोटरों का रुख बीजेपी के लिए राज्य में खतरे की घंटी है.

अस्वस्थ होने की वजह से पिछले कुछ महीनों से पर्रिकर का अधिकतर समय अस्पताल में ही बीता है. लोकप्रियता के मामले में पर्रिकर से कांग्रेस नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिंगबर कामत अधिक पीछे नहीं हैं. कामत को 26 फीसदी वोटरों ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया. महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (MGP) नेता सुधीर धवलीकर को 8 फीसदी वोटरों ने मुख्यमंत्री के तौर पर पहली पसंद बताया.

गोवा के लिए सर्वे में लोगों से पूछा गया कि अगर पर्रिकर मुख्यमंत्री के लिए दावेदार ना हों तो क्या फिर भी BJP का समर्थन करेंगे? इस सवाल का 41 फीसदी प्रतिभागियों ने ‘हां’ में जवाब दिया. वहीं 32 फीसदी वोटरों ने ऐसी स्थिति में BJP को समर्थन नहीं देने की बात कही. 27% लोग इस सवाल पर कोई स्पष्ट राय नहीं जता सके.

अगर कामकाज के पैमाने पर देखा जाए तो मनोहर पर्रिकर सरकार के प्रदर्शन से  सर्वे में 41 फीसदी लोग नाखुश दिखे. सिर्फ 38 फीसदी वोटर ही पर्रिकर सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं. वहीं 9 फीसदी प्रतिभागियों ने राज्य सरकार के कामकाज को औसत बताया. 12 फीसदी वोटर इस मामले में कोई स्पष्ट राय नहीं व्यक्त कर सके.

जहां तक प्रधानमंत्री के लिए पसंद का सवाल है तो गोवा में लोकप्रियता के मामले में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी में अधिक अंतर नहीं दिखा. मोदी को 40% प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के लिए पहली पसंद बताया. वहीं 37% ने कहा कि वे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के पद पर देखना चाहते हैं. हालांकि इस मामले में 23% वोटर कोई स्पष्ट राय नहीं जता सके.  

PSE सर्वे के मुताबिक गोवा के लोगों के लिए महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है. वोटरों ने अन्य अहम मुद्दों में बेरोजगारी, सड़कों की स्थिति, नाला-नाली/साफ सफाई और पीने के पानी को गिनाया.

PSE सर्वे में गोवा के 2 संसदीय क्षेत्रों में 950 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. गोवा में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में 40 सदस्यीय सदन में कांग्रेस ने 17, BJP ने 13,MAG और GFP ने 3-3, NCP ने 1 और निर्दलीयों ने 3 सीट जीती थी. BJP ने अन्य पार्टियों के समर्थन से गोवा में सरकार बनाने में कामयाबी पाई थी.

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