शिवसेना में कलह के नतीजतन आयी दरार पर आधारित मराठी फिल्म झंडा एक मंत्री के पुत्र की आपत्तियों के चलते प्रदर्शित नहीं हो पायी है और इस वजह से राजनीतिक दलों के बतौर सेंसर काम करने के बढ़ते चलन को लेकर बहस छिड़ गयी है.
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री नारायण राणे के पुत्र नीतेश की आपत्ति के बाद इस फिल्म के प्रदर्शन को रोक दिया गया था. नीतेश का आरोप है कि फिल्म में उनके पिता का खराब चित्रण किया गया है. इस घटना ने राजनीतिक सेंसरशिप के मुद्दे को एक बार फिर उठा दिया है.
फिल्म ‘वेक अप सिड’ में मुंबई को ‘बंबई’ बताने पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने फिल्मकार करण जौहर पर माफी मांगने का दबाव डाला था और तब भी राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप का मुद्दा उठा था. जोहर की ही तरह ‘झंडा’ के निर्देशक अवधूत गुप्ते को भी दबाव के आगे झुकना पड़ा है.
नीतेश ने कहा कि गुप्ते सदा मालवणकर के किरदार को हटाने पर राजी हुए थे. उन्होंने कहा कि गुप्ते ने मुझे आश्वासन दिया था कि फिल्म में सदा मालवणकर नजर नहीं आयेगा और वह फिल्म की दोबारा शूटिंग कर किरदार को हटायेंगे. भ्रष्ट राजनेता उसमें होंगे लेकिन उसमें सदा मालवणकर नहीं होगा.