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PM Modi Interview: घर बनाने वालों को देना चाहते थे जीएसटी में बड़ी राहत: मोदी

पीएम ने कहा कि देश के लिए जीएसटी एक नया और व्यापक टैक्स सुधार है. देश में जहां पूर्व में 30-40 फीसदी की दर से दर्जनों तरह के टैक्स लगाए जाते थे और इसके साथ कई छिपे हुए टैक्स भी लगते थे, जीएसटी ने इस प्रणाली को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. मौजूदा समय में देश में 300 से अधिक उत्पादों और सेवाओं पर शून्य जीएसटी है और इससे आम आदमी को बड़ा राहत पहुंच रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो-रॉयटर्स) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो-रॉयटर्स)

केन्द्र सरकार आम आदमी को बड़ी राहत पहुंचाने के लिए घर बनाने में  इस्तेमाल होने वाले उत्पादों पर रेस्तरां की तर्ज पर 5 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने की पक्षधर है. इस खुलासे के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने माना है कि जीएसटी लागू करने से देश में छोटे कारोबारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है.

जीएसटी से कारोबारियों को हुई दिक्कत पर सफाई देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि किसी बड़े आर्थिक सुधारों को लागू करने पर शुरुआती दिनों में अर्थव्यवस्था में दबाव देखना स्वाभाविक है. मोदी ने कहा कि ठीक इसी तरह 1991 में जब डॉ. मनमोहन सिंह देश के वित्त मंत्री थे और देश ने उदार नीति की तरफ कदम बढ़ाया तब शुरुआती दिनों में देश की जीडीपी को 2 फीसदी से अधिक का नुकसान हुआ लेकिन समय के साथ न सिर्फ इस नुकसान की भरपाई हुई बल्कि देश की जीडीपी ने तेज रफ्तार से आगे की दिशा में बढ़ना शुरू किया.

न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में पीएम ने कहा कि उनकी सरकार हाल में जीएसटी में बदलाव कर आम आदमी को राहत पहुंचाने के लिए घर बनाने में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर रेस्तरां के तर्ज पर महज 5 फीसदी टैक्स लगाने का बदलाव लाना चाहती थी. लेकिन केन्द्र सरकार अपने अधिकार क्षेत्र से इस काम को पूरा नहीं कर सकी और फिलहाल यह मामला जीएसटी काउंसिल के पास है.

पीएम ने कहा कि देश के लिए जीएसटी एक नया और व्यापक टैक्स सुधार है. देश में जहां पूर्व में 30-40 फीसदी की दर से दर्जनों तरह के टैक्स लगाए जाते थे और इसके साथ कई छिपे हुए टैक्स भी लगते थे, जीएसटी ने इस प्रणाली को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. मौजूदा समय में देश में 300 से अधिक उत्पादों और सेवाओं पर शून्य जीएसटी है और इससे आम आदमी को बड़ा राहत पहुंच रही है.

पीएम मोदी ने कहा कि चूंकि जीएसटी पूरी तरह से एक टेक्नोलॉजी आधारित टैक्स व्यवस्था है लिहाजा छोटे कारोबारियों को इसे आत्मसात करने में दिक्कतें हुई हैं. लेकिन इसके लिए भी लगातार कोशिशें जारी हैं और जल्द सभी दिक्कतों को दूर कर इसे आदर्श स्थिति में पहुंचा दिया जाएगा.

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