PM नरेंद्र मोदी ने जजों और मुख्यमंत्रियों की कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि देश को और मजबूत बनाना होगा. उन्होंने जजों की तुलना भगवान से की.
PM मोदी ने राजधानी के विज्ञान भवन में अपनी बात रखते हुए कहा कि लोग भगवान के न्याय के बाद अगर किसी पर भरोसा रखते हैं, तो वे हैं न्यायाधीश. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में उत्तम प्रतिभा की जरूरत है. उन्होंने न्यायिक सुधार को लेकर अपनी बात रखी. 'सिर्फ कड़े कानून यौन हिंसा से नहीं कर सकते महिलाओं की सुरक्षा'
प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका को मजबूत भी होना चाहिए और पूरी तरह समर्थ भी. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में सरकार और नेताओं का कोई दखल नहीं होना चाहिए. मोदी ने न्यायिक व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया.
सलाना दो बार आयोजित होने वाले इस कॉन्फ्रेंस का मुद्दा न्यायिक सुधार है. कॉफ्रेंस में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शामिल हो रहे हैं. यह कार्यक्रम दिनभर चलेगा. जस्टिस कुरियन ने PM मोदी को लिखा खत
नरेंद्र मोदी ने कहा कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए देश को अच्छे कानूनी संस्थानों की स्थापना और सक्षम लोगों की जरूरत है. उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'देश की न्यायिक प्रणाली में लोगों का बहुत विश्वास है. हमें आने वाले सालों में इस क्षेत्र में कदम रखने वाले मानव संसाधन को सक्षम बनाने की जरूरत है. हमें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह सोचना पड़ेगा कि हम किस तरह से अच्छे कानूनी संस्थानों की स्थापना कर सकते हैं.'
मोदी ने कहा, 'देश की न्याय प्रणाली पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. वास्तव में, हम सभी अपनी क्षमताओं के मुताबिक जिम्मेदारियों को उठा रहे एक ही तरह के लोग हैं. लेकिन न्याय प्रणाली में काम कर रहे लोगों के साथ ऐसी स्थिति नहीं है. ये जो काम करते हैं, वह पवित्र है. भगवान ने आपको इस ईश्वरीय जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए भेजा है.'
PM ने पेंडिंग मामलों पर भी ध्यान दिलाया
लंबित मामलों के बारे में बात करते हुए मोदी ने कहा कि लोगों को यह सोचने की जरूरत है कि बिजली के बिना व अन्य जटिलताओं के बीच अदालतें किस तरह से काम करती हैं.
मोदी के मुताबिक, 'हम सभी अदालतों में लंबित पड़े मामलों के बारे में बात करते हैं. लेकिन क्या हमने कभी न्यायपालिका द्वारा उन मामलों पर खर्च किए गए समय या इस दौरान आ रही समस्याओं के बारे में सोचा है.'
न्यायिक प्रणाली में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के बारे में बात करते हुए मोदी ने कहा, 'इस क्षेत्र में हम जितनी जल्दी प्रौद्योगिकी लाएंगे, उतनी ही सरलता से यहां बदलाव देखने को मिलेगा.'
हालांकि इस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जोसफ कुरियन शामिल नहीं हुए. उन्होंने पीएम की डिनर पार्टी पर ऐतराज जताते हुए चिट्ठी भी लिखी थी. दिल्ली में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीशों की कॉन्फ्रेंस 3 अप्रैल यानी गुड फ्राइडे के दिन शुरू हुई थी. शनिवार को रात 8 बजे सभी न्यायाधीशों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष डिनर का आयोजन किया. जस्टिस कुरियन ने मोदी को लिखे अपने खत में कहा था कि वे इस डिनर में शामिल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि इसका आयोजन गुड फ्राइडे के जश्न के साथ हो रहा है और वे इन दिनों अपने परिवार के साथ केरल में रहेंगे..