अमेरिका के राष्ट्रपति रहे अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र क्या है, यह बताया था. लिंकन ने कहा था- लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए शासन है. अब कोरोना वायरस की महामारी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सुबह 7 बजे से शाम 9 बजे तक 'जनता कर्फ्यू' लगाने की बात तो की, लेकिन कुछ इसी अंदाज में.
पीएम मोदी ने कहा कि हमें 22 मार्च, रविवार को सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक जनता कर्फ्यू का पालन करना है. उन्होंने जनता कर्फ्यू का अर्थ भी बताया. इसका अर्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जनता कर्फ्यू यानी जनता के लिए, जनता की ओर से खुद पर लगाया गया कर्फ्यू. उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से 22 मार्च तक हर दिन कम से कम 10 लोगों को फोन करके कोरोना वायरस से बचाव के उपायों के साथ ही जनता कर्फ्यू के बारे में भी जानकारी देने की अपील की.
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पीएम मोदी ने कहा कि यह जनता कर्फ्यू एक तरह से हमारे लिए एक कसौटी की तरह होगा. कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए भारत कितना तैयार है, यह देखने और परखने का भी समय है. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि 22 मार्च के दिन शाम 5 बजे हम ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित करें, जो अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना वायरस से लड़ाई लड़ने में सहयोग कर रहे हैं.
रविवार शाम 5 बजे बजेगा सायरन
प्रधानमंत्री ने धन्यवाद अर्पित करने का तरीका भी बताया और कहा कि ठीक 5 बजे हम अपने घर के दरवाजे पर, बालकनी में, खिड़की के सामने 5 मिनट तक खड़े होकर ताली या थाली बजाएं. उन्होंने प्रशासन से भी ठीक 5 बजे सायरन बजाकर इसकी याद दिलाने की अपील की.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 22 मार्च को हमारा यह प्रयास हमारे आत्म-संयम और देशहित में कर्तव्य पालन के संकल्प का प्रतीक होगा. जनता कर्फ्यू की सफलता और इसके अनुभव हमें आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार करेंगे. इससे पहले प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस की महामारी को विश्वयुद्ध से भी खतरनाक बताया और 65 साल से अधिक उम्र के नागरिकों से आने वाले कुछ सप्ताह तक घर से न निकलने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा कि ऐसे में जब विज्ञान भी इससे निपटने के उपाय नहीं बता पा रहा, वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, बचाव ही उपाय है. पीएम ने सोशल डिस्टैन्सिंग को जरूरी बताया.