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पीयूष गोयल बोले- साल भर में कर लेंगे नए ऐलान से हुए 1.45 लाख करोड़ के घाटे की भरपाई

टैक्स दरों में कटौती पर पीयूष गोयल ने कहा कि इस मामले पर उद्योग जगत के लोगों ने अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई थी. मोदी सरकार ने तेजी से बढ़ रही व्यवस्था के लिए हर सेक्टर, हर वर्ग पर फोकस किया. सरकार का ध्यान आर्थिक और समाजिक तौर पर पिछड़े वर्ग पर भी बना हुआ है.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल

  • देश को वेल्थ क्रिएटर की जरूरत, मोदी की नजर हर वर्ग पर
  • साल भर में पूरा हो जाएगा 1.45 लाख करोड़ का राजस्व घाटा
अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर केंद्र सरकार को एक के बाद एक कई झटके लग रहे थे, तभी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का ऐलान किया. निर्मला सीतारमण ने कैपिटेल गेन से सरचार्ज वापस लेने का फैसला किया है. नए फैसले के बाद सरकार को 1.45 लाख करोड़ का राजस्व घाटा होगा लग सकता है.

मुंबई में हो रहे इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में जब वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से सरकार को होने वाले संभावित घाटे से उबरने के मुद्दे पर जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा भले ही तत्काल पूरा न हो सके, लेकिन साल भर बाद राजस्व घाटा पूरा हो सकता है.

पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार को जीएसटी और इनकम टैक्स के जरिए भी मदद मिलेगी, जो अर्थव्यवस्था सुधारने में सहायक हो सकते हैं.

टैक्स में कटौती सरकार के लिए स्टेरॉयड नहीं

कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती के मामले पर इंडिया टुडे के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने स्टेरॉयड कहा, तो पीयूष गोयल ने जवाब दिया कि टैक्स में कटौती सरकार के लिए स्टेरॉयड नहीं है. इस पर फैसला काफी सोचने और समझने के बाद लिया गया है. सरकार ने इस मामले में अलग-अलग सेक्टर के कारोबारियों और एक्सपर्ट्स के बातचीत की, जिसके बाद यह फैसला लिया.

सरकार ने सभी पहलुओं पर गौर किया, उद्दोग जगत के उतार-चढ़ाव पर भी विचार किया, जिसके बाद टैक्सों में कटौती का फैसला लिया गया. अर्थव्यवस्था के लिए सरकार का यह फैसला हितकर साबित होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर हर वर्ग पर

बड़े टैक्स की दरों में कटौती पर पीयूष गोयल ने कहा कि इस मामले पर उद्योग जगत के लोगों ने अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबकी सुनते हैं, किसी एक विशेष वर्ग की नहीं बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों, इंडस्ट्री, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नजर रखते हैं. मोदी सरकार ने तेजी से बढ़ रही व्यवस्था के लिए हर सेक्टर, हर वर्ग पर फोकस किया. सरकार का ध्यान आर्थिक और समाजिक तौर पर पिछड़े वर्ग पर भी बना हुआ है.

देश को वेल्थ क्रिएटर की जरूरत

कांग्रेस के सूट बूट के सरकार और हाउडी मोदी के सवाल पर पीयूष गोयल ने हंसकर कहा कि कॉर्पोरेट के लोगों ने सूट पहन रखा है, हमने तो नहीं पहना है. लेकिन जीवन का यह तथ्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव जीतने के बाद पहले ही भाषण में कहा कि 23 मई को पीएम मोदी ने कहा था कि पहली बार चुनाव भ्रष्टाचार और धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर नहीं लड़ा गया.

यह चुनवा परफॉर्मेंस के आधार पर लड़ा गया. अब इस देश के में केवल जो जातिया हैं, पहली गरीब दूसरी वेल्थ क्रिएटर. वेल्थ क्रिएटर जनता के भले के लिए जरूरी हैं. उनकी वजह से आखिरी व्यक्ति तक रोजगार की पहुंच होती है.

ज्यादा एक्सपोर्ट ग्रोथ रेट में सुधार के लिए जरूरी

जेपी मॉर्गन के इकॉनमिस्ट साजिद चिनॉय ने पीयूष गोयल का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि केंद्र के कॉर्पोरेट टैक्सेज में कटौती का परिणाम मीडियम इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा पड़ेगा.

भारत 8 से 9 फीसदी ग्रोथ रेट तब तक हासिल नहीं कर सकता, जब तक पूरी तरह से एक्सपोर्ट अच्छा नहीं होता है. इसलिए हमें हमारा टार्गेट ज्यादा एक्सपोर्ट करने पर केंद्रित होना चाहिए.

इस कॉन्क्लेव में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन रजनीश कुमार, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह, जेबी मॉर्गन के अर्थशास्त्री साजिद चिनॉय और क्रेडिट क्रेडिट सुइस के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा भी मौजूद रहे.

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