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केंद्रीय दल भेजने के पीछे टकराव की मंशा नहीं: चिदम्बरम

संप्रग के एक सहयोगी दल के दबाव में पश्चिम बंगाल में केंद्रीय दल भेजे जाने के वाम और विपक्ष के आरोपों के बीच गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने सोमवार को स्पष्ट किया कि विपक्ष को इस मामले में कोई अन्य अर्थ नहीं निकालना चाहिए.

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संप्रग के एक सहयोगी दल के दबाव में पश्चिम बंगाल में केंद्रीय दल भेजे जाने के वाम और विपक्ष के आरोपों के बीच गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने सोमवार को स्पष्ट किया कि विपक्ष को इस मामले में कोई अन्य अर्थ नहीं निकालना चाहिए.

राज्य में केंद्रीय दल को किसी टकराव की मंशा से नहीं भेजा जा रहा. पश्चिम बंगाल में केंद्रीय दल भेजे जाने के बारे में सोमावर को राज्यसभा में शून्यकाल में स्पष्टीकरण देते हुए चिदम्बरम ने कहा ‘‘इसे टकराव की भावना से नहीं भेजा जा रहा है. हमें राज्य की मदद करने के लिए मिल कर काम करना चाहिए.’’ इससे पहले सदन की बैठक शुरू होते ही वाम दलों के सदस्यों ने यह मुद्दा उठाते हुए प्रश्नकाल स्थगित कर इस मामले पर चर्चा कराने की मांग की. इसे लेकर सदन में शोरगुल शुरू हो गया और वाम दलों के सदस्य अपनी मांग पर जोर देते हुए आसन के सामने आ गए. इस पर सभापति हामिद अंसारी ने पहले पंद्रह मिनट के लिए और बाद में दोपहर बारह बजे तक के लिए सदन की बैठक स्थगित कर दी. इस वजह से सदन में सोमवार को प्रश्नकाल नहीं हो सका.

चिदम्बरम ने अपने बयान में कहा कि राज्य में एक केंद्रीय दल भेजा जाना प्रस्तावित है. उन्होंने कहा कि केंद्र की मंशा राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति तथा विभिन्न दलों के बीच आपसी टकराव की बढ़ती घटनाओं को रोकने में राज्य सरकार की मदद करने की है. गृह मंत्री ने कहा कि केंद्रीय दल गैर टकराव की मंशा के साथ राज्य में भेजा जाएगा और इस मामले में विपक्ष को कोई अन्य अर्थ नहीं निकालना चाहिए. चिदम्बरम ने कहा ‘‘मैंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धेदव भट्टाचार्य से एक से अधिक बार संपर्क किया था. हम दोनों ही पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’’ गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने भट्टाचार्य को राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति की एक बार और समीक्षा करने का सुझाव दिया था.

शून्यकाल में गृह मंत्री के बयान के बाद विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि संघीय व्यवस्था में केंद्र को कानून एवं व्यवस्था कायम रखने में राज्य को सहयोग देना होता है. उन्होंने कहा कि केंद्र को यह आश्वासन देना चाहिए कि पश्चिम बंगाल में भेजा जाने वाला केंद्रीय दल संप्रग के सहयोगी दल के कहने पर नहीं भेजा जा रहा है. यह सहयोगी दल राज्य सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करना चाहता है. माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि केंद्रीय दल को लेकर इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं पश्चिम बंगाल में अनुच्छेद 356 न लगा दिया जाए. उन्होंने कहा कि पूर्व में भी वाम शासित सरकारों के खिलाफ अनुच्छेद 356 लगाया जाता रहा है.

येचुरी ने कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम को आशंका की नजर से इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि यह एक खास राजनीतिक माहौल में किया जा रहा है. माकपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकार के कुछ मंत्री नक्सलवाद को संरक्षण दे रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के उपर कुछ खास तरह के दबाव काम कर रहे हैं. येचुरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भेजा जाने वाला केंद्रीय दल राज्य सरकार की सलाह पर ही विभिन्न जगहों का दौरा करे. सपा के अमर सिंह ने भी केंद्र के इस कदम के पीछे अनुच्छेद 356 लागू करने की मंशा होने की आशंका जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को अपने सहयोगियों के दबाव में नहीं झुकना चाहिए. कम्युनिस्ट डी राजा ने कहा कि केंद्र को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचे. कांग्रेस के केशव राव ने कहा कि एक बड़े वामपंथी नेता कह चुके हैं कि केंद्रीय दल अगर पश्चिम बंगाल जाता है तो उसे जाने दिया जाए और हमें कोई आपत्ति नहीं है.

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