मध्यप्रदेश में पश्चिम बंगाल की तरह पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच टकराव की खबर आ रही है. कमलनाथ सरकार की पुलिस प्लेटिनम प्लाजा पहुंच गई है और सीआरपीएफ के साथ भिड़ गई है. इसके अलावा पुलिस ने भोपाल और इंदौर में छापेमारी के ठिकानों पर घुसने की कोशिश भी की. बता दें, भोपाल के प्लेटिनम प्लाजा में आयकर विभाग ने छापेमारी की है. यहां की छठी मंजिल पर प्रतीक जोशी और अश्विनी शर्मा रहते हैं.
पश्चिम उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन को मुस्लिम वोटों में बिखराव का डर सता रहा है. यही वजह है कि सहारनपुर के देवबंद की संयुक्त रैली में बसपा अध्यक्ष मायावती ने मुस्लिमों को बार-बार सचेत करते हुए कहा कि किसी भी सूरत में अपने वोट को बंटने नहीं देना. कांग्रेस इस लायक नहीं है कि वो बीजेपी को टक्कर दे सके, जबकि महागठबंधन के पास मजबूत आधार है. ऐसे में अपने वोटों का बिखराव मत करना और एकजुट होकर गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में वोट करना.
जम्मू-कश्मीर में हाइवे बैन पर घाटी की सियासत में उबाल आ गया है. जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने साफ कहा है कि वे केंद्र सरकार के इस आदेश को नहीं मानती हैं. तमतमायी महबूबा ने कहा कि ये हमारी सड़कें हैं, ये राज्य हमारा है और हम जब चाहेंगे इस पर निकलेंगे. महबूबा ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा वे लोग कश्मीरियों को कुचलना चाहते हैं, राज्य की आबादी का पैटर्न बदलना चाहते हैं, और कश्मीर के लोगों को अपनी जमीन पर कैद करना चाहते हैं, ऐसा मेरी लाश पर ही होगा.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर आयकर विभाग के छापे को लेकर सरकार की ओर से पहली प्रतिक्रिया आई है. मोदी सरकार में वित्त मंत्रालय संभाल रहे अरुण जेटली ने कहा कि चुनाव आयोग और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियां चुनाव के दौरान काले धन पर नजर रखती हैं. यह उनका काम है. राजनीति से इसका कोई लेना-देना नहीं है. वे हमारे पास नहीं आतीं और रिपोर्ट नहीं करती हैं.
चुनाव नजदीक आने के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों की ओर से प्रचार अभियान जोर पकड़ रहा है. इस साल फरवरी-मार्च में फेसबुक पर राजनीतिक दलों द्वारा विज्ञापनों पर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए. फेसबुक एड लाइब्रेरी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फरवरी और 30 मार्च के बीच 51,810 राजनीतिक विज्ञापनों पर 10.32 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए. इसमें से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके समर्थक विज्ञापनों पर बड़ा हिस्सा खर्च कर रहे हैं.