साल 2014 में नई सरकार बनने के बाद सांसदों को दिल्ली के 5 स्टार होटल में रखने पर आलोचना झेलने वाली मोदी सरकार ने इस बार पहले ही जीतकर आए नए सांसदों के रहने की अलग व्यवस्था कर दी है. केंद्र सरकार ने 17वीं लोकसभा के 350 सांसदों को जब तक स्थायी निवास नहीं मिल जाता तब तक के लिए उनके अस्थाई प्रबंध किया है और उन्हें होटल में रहने की जरूरत नहीं होगी.
नियमों के अनुसार लोकसभा भंग होने पर पूर्व सांसदों को दिल्ली में मिला सरकारी आवास खाली करना होता है ताकि नए सांसदों को उसका आंवटन किया जा सके. बीते 25 मई को ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 16वीं लोकसभा को भंग कर दिया था जिसके बाद एक महीने के भीतर पूर्व सांसदों को सरकारी आवास छोड़ना होगा.
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने नए 350 सांसदों के ठहरने के लिए अभी अस्थाई प्रबंध किया है जब तक कि पूर्व सांसद आवास छोड़ नहीं देते हैं. सरकार ने इस बार यह भी फैसला किया है कि किसी भी सांसद को पांच सितारा होटल में रहने की सुविधा नहीं दी जाएगी.
बता दें कि अगर कोई सांसद आवंटित सरकारी आवास को तय समय सीमा के अंदर खाली नहीं करता तो उसके खिलाफ सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. 17वीं लोकसभा में 300 ऐसे सांसद हैं जो पहली बार संसद के निचले सदन के लिए चुने गए हैं.
इनमें क्रिकेटर से राजनेता बने गौतम गंभीर, केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद और स्मृति ईरानी, सूफी गायक हंस राज हंस और बांग्ला सिनेमा की अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती और नुसरत जहां रूही प्रमुख हैं पिछली लोकसभा में 314 सांसद पहली बार निर्वाचित हुए थे.