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ममता बोलीं- मोदी सरकार तानाशाह, हालात इमरजेंसी से भी बदतर

नाराज ममता ने नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिग इंडिया (नीति) आयोग का लेटर लहराते हुए मीडिया कर्मियों से यह बात कही. पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा, 'केंद्र प्रायोजित योजनाओं को तर्कसंगत बनाने की हाल में की गईं सिफारिशें एकतरफा हैं.

ममता बनर्जी ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. ममता ने मोदी सरकार को तानाशाह जैसा बताया. उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार के आते ही देश में आपातकाल से भी बदतर हालात पैदा हो गए हैं.

नाराज ममता ने नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिग इंडिया (नीति) आयोग का लेटर लहराते हुए मीडिया कर्मियों से यह बात कही. पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा, 'केंद्र प्रायोजित योजनाओं को तर्कसंगत बनाने की हाल में की गईं सिफारिशें एकतरफा हैं. बीजेपी शासित राज्यों के सीएम ने ने सीसीएस को तर्कसंगत बनाने की जो सिफारिश की है, वह संघीय स्वरूप पर हमला है.

घमंडी है मोदी सरकार
ममता ने सहयोगी संघवाद का जिक्र करते हुए कहा, 'वे वास्तव में राज्यों और लोकतंत्र को डरा रहे हैं. यह कुछ और नहीं तानाशाही है. मैं जानना चाहती हूं कि क्या वे लोग देश में राष्ट्रपति प्रणाली वाली सरकार चला रहे हैं?' उन्होंने कहा, 'मैंने अब तक इतनी घमंडी सरकार नहीं देखी. यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान का मुद्दा भी तबाही का रूप लेता जा रहा है.'

राज्यों की शक्तियां कम कर रही केंद्र
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इससे पहले इस महीने सीसीएस के न्यायसंगत बनाने की प्रमुख संस्तुतियों को स्वीकार कर लिया है. इनमें केंद्र और राज्यों के बीच धन की हिस्सेदारी के तरीके में बदलाव सहित कुल योजनाओं की अधिकतम संख्या 30 तक रखने की संस्तुति की गई है. इसपर ममता बनर्जी ने कहा कि इस कदम के पीछे मकसद उन राज्यों को वंचित कर देना है, जहां बीजेपी सत्ता में नहीं है.

राज्यों के खजाने पर निगरानी क्यों?
ममता ने कहा, 'उन लोगों ने एक सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली बनाई है, जिसका मकसद राज्यों द्वारा किए जा रहे खर्च पर नजर रखना है. मैं पूछना चाहती हूं कि वे राज्य के खजाने पर नजर क्यों रखना चाहते हैं? मीडिया से लेकर शिक्षा तक, केंद्र सरकार हर चीज को नियंत्रित करना चाहती है. वे एक चुनी हुई सरकार को अपने नियंत्रित में लेने का प्रयास कर रहे हैं.'

राष्ट्रपति से लगाएंगे गुहार
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि केंद्र सरकार की भेदभाव वाली कार्रवाई के खिलाफ राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की गुहार लगाई जाएगी. उन्होंने कहा, 'यह लोकतंत्र को रोकने का खतरनाक लाल संकेत है. हमलोग राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की मांग करेंगे और लोकतंत्र और संघीय स्वरूप पर केंद्र सरकार के लगातार हमले के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन भी किया जाएगा.'

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