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MOTN: 69 फीसदी लोगों ने माना- चीन को मोदी सरकार ने दिया करारा जवाब

भारत और चीन के बीच जारी विवाद पर देश की जनता से सवाल पूछा गया. उनसे पूछा गया कि मोदी सरकार चीन मसले को हैंडल करने में कितना कामयाब रही. इसमें 69 फीसदी लोगों ने माना कि भारत ने चीन को करारा जवाब दिया.

भारत ने चीन को दिया करारा जवाब भारत ने चीन को दिया करारा जवाब

  • 15 फीसदी लोगों ने माना भारत जवाब नहीं दे सका
  • 9 फीसदी ने कहा भारत सरकार जानकारी छुपा रही

भारत और चीन के बीच तनाव गलवान घाटी में झड़प के बाद चरम पर पहुंच गया था. इसके बाद पूरे देश में चीन के खिलाफ माहौल था. इसी को लेकर आजतक ने मूड ऑफ द नेशन जानने के लिए एक सर्वे किया. सर्वे में लोगों से पूछा गया किया मोदी सरकार चीन विवाद को हैंडल करने में कितना कामयाब रही.

इसमें से 69 फीसदी लोगों ने कहा कि मोदी सरकार ने चीन को करारा जवाब दिया. जबकि 15 फीसदी लोगों ने कहा कि भारत जवाब नहीं दे सका. इसके अलावा 9 फीसदी लोगों ने कहा कि भारत सरकार लोगों से जानकारी छुपा रही है और 7 फीसदी लोगों ने कहा कि कुछ कह नहीं सकते.

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इसके अलावा लोगों से यह भी पूछा गया कि लद्दाख में भारत-चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प के लिए जिम्मेदार कौन है. इनमें से 47 फीसदी लोगों ने कहा कि झड़प के लिए चीन की विस्तारवादी नीति जिम्मेदार है, जबकि 30 फीसदी लोगों ने माना कि भारत की फेल विदेश नीति इसके लिए जिम्मेदार है. इस सवाल के जवाब में 11 फीसदी लोगों का मानना है कि यह खुफिया तंत्र की नाकामी का नतीजा है, जबकि 12 फीसदी लोगों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

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आजतक के लिए ये सर्वे कर्वी इनसाइट्स लिमिटेड ने किया. जिसमें 12 हजार 21 लोगों से बात की गई. इनमें से 67 फीसदी ग्रामीण जबकि शेष 33 फीसदी शहरी जनता थी. 19 राज्यों की कुल 97 लोकसभा और 194 विधानसभा सीटों के लोग सर्वे में शामिल किए गए.

जिन 19 राज्यों में ये सर्वे किया गया उनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. ये सर्वे 15 जुलाई से 27 जुलाई के बीच किया गया.

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सर्वे में 52 फीसदी पुरुष, 48 फीसदी महिलाएं शामिल थीं. अगर धर्म के नजरिए से देखा जाए तो 86 फीसदी हिंदू, 9 फीसदी मुस्लिम व पांच फीसदी अन्य धर्मों के लोगों से उनकी राय जानी गई. जिन लोगों पर सर्वे किया गया उनमें 30 फीसदी सवर्ण, 25 फीसदी एससी-एसटी व 44 फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग के लोग शामिल थे.

सर्वे में शामिल 57 फीसदी लोग 10 हजार रुपये महीने से कम की आमदनी वाले थे जबकि 28 फीसदी 10 से 20 हजार रुपये और 15 फीसदी 20 हजार रुपये महीने से ज्यादा कमाने वाले लोग थे. सर्वे के सैंपल में किसान, नौकरी पेशा, बेरोजगार, व्यापारी, छात्र आदि को शामिल किया गया था.

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