मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल के 6 महीने पूरे हो गए हैं. सरकार के 6 महीने के कार्यकाल को देखें तो तीन तलाक समाप्त करने, कश्मीर से धारा 370 हटाने जैसे बड़े फैसले हुए. वहीं, राम मंदिर के सबसे पुराने मसले का समाधान भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मोदी सरकार के इसी कार्यकाल में हो गया है. हालांकि, आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है.
वहीं चुनावी सफलता के लिहाज से ये 6 महीने सत्ता पर बैठी पार्टी के लिए अच्छे नहीं कहे जाएंगे. महाराष्ट्र बीजेपी के हाथ से खिसक गया है और वर्षों पुराना साथी भी साथ छोड़कर चला गया. हरियाणा में भी बैखासी के सहारे सत्ता बचानी पड़ी है.
30 मई 2019 को नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद पहली बार महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी को चुनाव का सामना करना पड़ा. हालांकि, दोनों राज्यों में पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए. हरियाणा में पूर्ण बहुमत की सरकार का एक कार्यकाल पूरा कर चुके मनोहर लाल खट्टर को दूसरी बार सत्ता संभालने के लिए दुष्यंत चौटाला को डिप्टी सीएम बनाना पड़ा और उनकी नई नवेली पार्टी का समर्थन लेना पड़ा.
हरियाणा की तरह महाराष्ट्र में भी बीजेपी ने अजित पवार के रूप में सहारा तलाशा, लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं पाए और बीजेपी का सफर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया. इतनी ही नहीं 30 साल पुरानी सहयोगी शिवसेना ने ब्रेकअप कर विरोधी एनसीपी और कांग्रेस से पैचअप कर सत्ता संभाल ली.
तीन तलाक के खिलाफ कानून
महाराष्ट्र के इस ताजा झटके से थोड़ा पहले चलें तो मोदी सरकार के 6 महीने कई बड़े फैसलों के गवाह बने. दूसरी बार सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने सबसे पहले मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने का कदम उठाया. 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019' को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराया गया. राज्यसभा में बहुमत न होने के बाद भी मोदी सरकार इस कानून को अमलीजामा पहनाने में कामयाब रही.
कश्मीर से हटाई गई धारा 370
धारा 370 एक ऐसा मुद्दा था, जो हमेशा से बीजेपी के चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा रहा. साल-दर साल इस पर चर्चा होती रही और मांग होती रही कि कश्मीर से कब यह धारा हटाई जाएगी. पांच साल (2014-19) सरकार चलाने के बाद जब दूसरी बार और ज्यादा मजबूती के साथ मोदी सरकार की वापसी हुई तो संसद में यह फैसला भी ले लिया गया. गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में खुद कश्मीर से धारा 370 के हटने का ऐलान किया. सिर्फ इतना ही नहीं, कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बांट दिया गया.
During the last six months, we have taken numerous decisions that have furthered development, accelerated social empowerment and enhanced India’s unity. We aspire to do even more in the times to come, so that we create a prosperous and progressive New India. #6MonthsOfIndiaFirst
— Narendra Modi (@narendramodi) November 30, 2019
मोदी सरकार अपने इस फैसले को सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक खुद अपने भाषणों में इस फैसले का जिक्र करना नहीं भूलते. दोनों नेताओं ने महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों में कश्मीर को ही सबसे आगे रखा और प्रमुख चुनावी एजेंडे के तौर पर पेश किया.
राम मंदिर पर आया फैसला
देश के सबसे पुराने केस यानी राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद का भी समाधान हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के हक में विवादित जमीन देने का फैसला सुनाया, जिसके बाद अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारियों पर चर्चा चल रही है. हालांकि, राम मंदिर निर्माण का रास्ता सुप्रीम कोर्ट के आदेश से साफ हो पाया है, लेकिन इस विवाद का निपटारा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के इन 6 महीनों के दौरान ही हो गया है.
असम में NRC लागू
असम में एनआरसी लागू करना भी मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक बड़ा निर्णय है. सिर्फ इतना ही नहीं, इसके बाद सरकार पूरे देश में एनआरसी लाने की तैयारी कर रही है. गृहमंत्री अमित शाह खुद संसद में इस बात का ऐलान कर चुके हैं. मौजूदा शीतकालीन सत्र में एक सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एनआरसी की प्रक्रिया की निगरानी की जाती है और एनआरसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें ऐसा कहा जाए कि इसमें दूसरे धर्म के लोगों को शामिल नहीं किया जाएग. उन्होंने कहा कि यह पूरे देश में लागू किया जाएगा और किसी को भी इससे डरने की जरूरत नहीं है.
इकोनॉमी पर घिरी सरकार
एनआरसी पर भले ही सरकार न डरने का आह्वान कर रही हो लेकिन जीडीपी की धीमी रफ्तार ने किसी को हर किसी को खौफजदा कर दिया है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत पर रह गई. यह 6 साल का न्यूनतम स्तर है. अर्थव्यवस्था की इस स्थिति पर पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह ने कहा है कि हमारी अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक है और हमारे देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 8-9 फीसदी की दर से हो सकती है. लेकिन पिछली दो तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ रेट में गिरावट चिंताजनक है. उन्होंने कहा है कि सिर्फ आर्थिक नीतियों में बदलाव से अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि अर्थव्यवस्था में जो भय का माहौल है, उसे आत्मविश्वास में बदलने की जरूरत है.
ऐसे में अब देखना होगा कि 6 महीने में कई बड़े फैसलों का गवाह बनने के बाद आने वाले वक्त में मोदी सरकार विपक्ष के इन सवालों और अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का कैसे सामना कर पाती है.