नरेंद्र मोदी सरकार ने वायु प्रदूषण दूर करने की दिशा में बड़ी योजना पर काम शुरू किया है. ताकि 2024 तक लोग स्वच्छ हवा में सांस ले सकें. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत हवा से प्रदूषण दूर करने की दिशा में काम शुरू हुआ है. यह मिशन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से चलाया जा रहा है. फिलहाल, दो साल के लिए मोदी सरकार ने तीन सौ करोड़ रुपये जारी किए हैं.
मोदी सरकार ने शुक्रवार को संसद में इसकी जानकारी भी दी. सांसद कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल के पूछने पर सरकार ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वायु की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए 29 राज्यों और छह संघ शासित प्रदेशों के 339 शहरों में 779 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं.
हवा साफ करने के लिए पंचवर्षीय नीति
मोदी सरकार ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए पंचवर्षीय नीति बनाई है. लोग मुंह पर मॉस्क लगाने की जगह खुली हवा में सांस ले सकें, इसके लिए देश भर में 779 मानव संचालित और 170 रियल टाइम वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है. योजना का मकसद, देश भर में वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क बढ़ाकर वायु प्रदूषण रोकना है.
सरकार का लक्ष्य है कि 2024 तक हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की सांद्रता में 20-30 प्रतिशत की कमी लाई जाए. तुलना के लिए 2017 को आधार वर्ष बनाया गया है. दरअसल, सांसद कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने पूछा था कि क्या केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की घोषणा की है. यदि हां, तो कार्यक्रम के तहत वर्तमान में कितने शहरों में मानवचलित गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित किए गए हैं या फिर प्रस्तावित हैं. जिसका जवाब देते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि 2024 तक सरकार ने वायु प्रदूषण में कमी लाने की तैयारी की है.