मोदी सरकार को एक साल होने को है. शनिवार को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सरकार का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया और बताया कि 'अच्छे दिन' आ चुके हैं. लेकिन दूसरी ओर पूर्व रक्षा मंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ए.के. एंटनी ने मोदी सरकार पर देशद्रोही होने का आरोप लगाया है.
आजतक को दिए इंटरव्यू में एंटनी ने भारत की सैन्य क्षमता और इसके आधुनिकीकरण, सीमा विवाद मुद्दे पर चीन के रवैये और 126 मल्टी-जेट फाइटर प्लेन की डील पर खुल कर बात की. बातचीत के दौरान उन्होंने सैन्य मुद्दों पर करार दिया.
देशद्रोही काम कर रही है मोदी सरकार
एंटनी ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर चीन की गतिविधियां और उसके द्वारा किया जा रहा विनिर्माण कार्य चिंताजनक है. उनके अनुसार सीमा पर है और स्ट्राइक कोर का अनुपात इससे भी कम है. मोदी सरकार द्वारा माउंटेन स्ट्राइक कोर की साइज को कम करने के फैसले को उन्होंने देशद्रोही करार दिया. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने चीन से सटी सीमा पर भारतीय पक्ष को मजबूत करने के लिए काफी काम किया था, लेकिन मोदी सरकार ने उन सारे काम को ठंडे बक्से में डाल दिया है. उन्होंने सवाल के लहजे में पूछा कि कोई
दोस्ती केवल शक्तिशाली लोगों के बीच
एंटनी ने कहा कि चीन अपनी सीमा को सुरक्षित करने के लिए स्वतंत्र है. लेकिन क्या भारत हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा? है. आप कमजोर रहकर शक्तिशाली से दोस्ती की उम्मीद नहीं कर सकते हैं.
राफाल पर उठे सवालों की जांच हुई या नहीं
126 मल्टी-जेट फाइटर प्लेन की डील पर हमें जबरन धीमे चलने पर मजबूर किया गया था. तब यशवंत सिंहा ने इस डील पर सवाल उठाए थे. हमने तब अपने अधिकारियों को राफाल डील को तब तक फाइनल नहीं करने का आदेश दिया था, जब तक सबसे कम टेंडर प्राइस न आ जाए. मोदी सरकार ने इस डील पर कुछ नया नहीं किया है, बस हमारे फैसले को आगे बढ़ाया है. थी, क्या सरकार ने उसकी जांच करवाई या बस डील फाइनल कर दी?
हमने किसी को सेवा से नहीं हटाया
जनरल वी.के. सिंह और एडमिरल डी.के. जोशी के इस्तीफे के मुद्दे पर एंथनी ने कहा कि उम्र संबंधी मामले के कारण जनरल सिंह वाला मसला हुआ था और एडमिरल जोशी ने इस्तीफा दिया था, जिसे मैंने स्वीकार किया था. इसमें कुछ भी व्यक्तिगत नहीं था. इसके उलट इसके पहले भी एनडीए सरकार ने नेवी चीफ को हटा दिया था.
सैन्य बजट नहीं हो पा रहा खर्च
एंटनी के अनुसार यूपीए सरकार के समय सैन्य बजट का 99 प्रतिशत खर्च होता था. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार केवल 88 प्रतिशत ही खर्च कर पाई और 19000 करोड़ रुपये लौट गए. थल सेना ने बजट से 40 प्रतिशत अधिक की मांग की थी. ऐसे में सैन्य आधुनिकीकरण की बात करने वाले