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नाबालिग रेप पीड़िता को बनना पड़ेगा बिन ब्याही मां, मेडिकल बोर्ड ने नहीं दी अबॉर्शन की इजाजत

बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नाबालिग का गर्भ 7 महीने का है. ऐसे में अगर इस स्टेज पर एबॉर्शन होता है तो यह पीड़ि‍ता के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद गठि‍त हुआ मेडिकल बोर्ड हाई कोर्ट के निर्देश के बाद गठि‍त हुआ मेडिकल बोर्ड

भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की मेडिकल बोर्ड ने 16 साल की नाबालिग रेप पीड़िता को एबॉर्शन करवाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है. हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, बोर्ड को जांच के बाद तय करना था कि पीड़ि‍ता के लिए गर्भपात जानलेवा तो नहीं.

बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नाबालिग का गर्भ 7 महीने का है. ऐसे में अगर इस स्टेज पर एबॉर्शन होता है तो यह पीड़ि‍ता के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. बता दें कि दो साल पहले नाबालिग लड़की का स्कूल के बाहर से अपहरण कर लिया गया था और रेप की घटना को अंजाम दिया गया.

पीड़ि‍ता के दावे और रिपोर्ट में फर्क
दिलचस्प बात यह है कि नाबालिग ने एबॉर्शन की इजाजत के लिए कोर्ट में जब याचिका दायर की, तब उसके मुताबिक गर्भ 24 हफ्ते का था, लेकिन एम्स के मेडिकल बोर्ड ने जांच की तो पता चला कि 30 हफ्ते पूरे हो चुके हैं.

गौरतलब है कि कानून देश में 20 हफ्ते से ऊपर के गर्भ को गिराने की इजाजत नहीं है. इसके पीछे तर्क यह है कि यह महिला के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.

पिछले हफ्ते कोर्ट के दर पर पहुंची पीड़िता
नबालिग रेप पीड़िता ने पिछले हफ्ते दिल्ली हाई कोर्ट मे अपने भ्रूण को गिराने की इजाजत मांगी थी. हाई कोर्ट ने नाबालिग को एबॉर्शन की इजाजत तो दे दी, लेकिन साथ ही निर्देश दिए थे कि एम्स का मेडिकल बोर्ड पहले सेहत और तमाम जरूरी जांच करेगा. दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया, जिसमें एक मनोचिकित्सक समेत चार डॉक्टर शामिल थे.

दूसरी ओर, लड़की के घरवाले बेहद परेशान हैं, क्योंकि उनका मत है कि बच्चे के जन्म के बाद न सिर्फ नाबालिग लड़की का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा बल्कि‍ बच्चे का भविष्य भी चिंता का कारण बन जाएगा.

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