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'वन नेशन, वन इलेक्शन' के समर्थन में मिलिंद देवड़ा, कहा 1967 में हुआ भी था ऐसा

पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का समर्थन किया है. देवड़ा ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव चर्चा योग्य है. हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि 1967 में देश में एक साथ चुनाव कराए गए थे.

मिलिंद देवड़ा (फाइल फोटो) मिलिंद देवड़ा (फाइल फोटो)

पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का समर्थन किया है. देवड़ा ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव चर्चा योग्य है. हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि 1967 में देश में एक साथ चुनाव कराए गए थे. सरकार को आम सहमति बनाने का प्रयास जारी रखना चाहिए. देवड़ा का यह बयान उस समय आया, जिस समय दिल्ली में इसी विषय पर सर्वदलीय बैठक हो रही थी.

देवड़ा ने कहा कि मेरा मानना है कि लगातार चुनावी मोड में रहना गुड गवर्नेन्स, वास्तविक समस्याओं को उठाने में बाधक होता है और लोकलुभावन वादों का गवर्नेन्स कैरेक्टर निश्चित रूप से देश के नागरिक जिन गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उसका दीर्घकालिक समाधान नहीं है. उन्होंने चुनावों के कारण कोष पर दबाव के तर्क को अनावश्यक बताते हुए कहा कि हमें किसी भी कीमत पर अपने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश को सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए एक एजेंडे की जरूरत है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के संदेह का उपहास उड़ाने की बजाय सरकार को आम सहमति बनाने के प्रयास करने चाहिए. ससकार को शिक्षाविद्, छात्र, चुनाव सुधार की दिशा में कार्य कर रहे संगठनों की भी सामूहिक राय लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश का राजनीतिक वर्ग तेजी से चर्चा की कला भूलता जा रहा है. इसका अंग मैं भी हूं. मेरी राय में यह भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है.

उन्होंने लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा के चुनाव कराए जाने पर इससे देश की सत्तारूढ़ पार्टी को लाभ होता है, इस आशंका को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि हाल में लोकसभा चुनाव के साथ अरूणाचल प्रदेश, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश में चुनाव हुए. इन तीन में से दो राज्यों में जीतने वाले दल भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में नहीं थे. गौरतलब है कि देवड़ा की अपनी पार्टी कांग्रेस इस प्रस्ताव के विरोध में है. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बुधवार को सरकार द्वारा सर्वदलीय बैठक को वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया था.

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