आज वो भले ही म्यूजिक इंडस्ट्री में एक जाना पहचाना नाम हो, लेकिन अंदर से वो एक दुखियारी मां है जो अपने बेटे को फिर से देखने को बेताब है. 9 साल हो गए जब गीता (बदला हुआ नाम) के बेटे को अगवा कर लिया गया था.
कोर्ट के मुताबिक भी केस तभी दोबारा खोला जाएगा जब आरोपी को गिरफ्तार किया जाए. लेकिन साल 2006 से इस केस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है. गीता की दुखभरी दास्तान शुरू हुई 1998 से, जब महज 9 साल की उम्र में उसकी शादी करवा दी गई. साल 2000 में गीता ने एक बेटे को जन्म दिया.
गीता के अनुसार, 'मेरा बेटा इस साल 15 साल का हो गया होगा. मैं उससे मिलने के लिए रोज तड़पती हूं. मैं छठी क्लास में पढ़ती थी जब मेरी शादी हो गई. मैं पढ़ना चाहती थी, एक करियर बनाना चाहती थी. लेकिन रिश्तेदारों के दबाव में आकर मेरे घरवालों ने मुझसे दुगनी उम्र के इंसान से मेरी शादी करवा दी. बाल विवाह के अलावा मुझे अपने पति और ससुराल वालों की यातनाएं भी झेलनी पड़ीं. कई बार वहां से भागना चाहा, पर कोई फायदा नहीं हुआ. आखिरकार 1999 में मैं अपने पति को छोड़कर बाहरी दिल्ली में शिफ्ट हो गई. खर्चा चलाने के लिए पड़ोस के बच्चों को ट्यूशन देना शुरु कर दिया. फिर साल 2000 में मेरा बेटा पैदा हुआ. मैं उसका ध्यान नहीं रख सकती थी, इसलिए मैंने उसे पंजाब में अपने माता-पिता के पास छोड़ दिया.'
घर ढूंढते वक्त गीता की मुलाकात परवेज से हुई. घर ढूंढने में उसने गीता की मदद की. फिर दोनों साथ में एक इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर शॉप चलाने लगे. परवेज ने गीता को झांसा दिया कि अगर वो दोनों शादीशुदा होने का नाटक करें तो आसानी से किराए पर घर मिल सकता है. गीता राजी तो हो गई, पर उसे नहीं पता था कि परवेज उसका यौन शोषण करना शुरू कर देगा. गीता ने हारकर अपने मकान मालिक को कई बार सच बताने की कोशिश की, पर किसी ने उसका यकीन नहीं किया.
जून 2006 में जब गीता अपने बेटे का ख्याल रखने के काबिल हो गई, तो उसने दिल्ली के एक स्कूल में उसका दाखिला करवा दिया. लेकिन परवेज अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. पुलिस में शिकायत करने की सोचने पर परवेज गीता और उसके बेटे को घर में बंद कर मारने की धमकी देता. आखिरकार 12 दिसंबर 2006 को वो गीता के बेटे को अगवा कर भाग गया. एफआईआर हुई. आरोपी पर आईपीसी की धाराएं 363, 364 ए, 343, 380, 376/506 लगाई गईं. पर आज तक कोई नतीजा नहीं निकला है.