केंद्रीय गृहमंत्रालय ने सोमवार को कहा कि उन्होंने कुछ ऐसे माओवादी नेताओं की पहचान की है जिन्होंने प्रोफेशनल कॉलेज में सीट पाने के लिए अपना फंड खर्च किया है. ये सभी फंड उन्होंने अपने रिश्तेदारों या बच्चों के लिए खर्च किया है. इस फंड को रोकने के लिए गृहमंत्रालय ने कुछ अफसरों की एक टीम बनाई है, जो कि इसे ट्रैक कर सके.
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने ऐसे ही कुछ मामलों की पहचान की है. जिसमें CPI (M) बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के नेता प्रद्युमन शर्मा पर एक प्राइवेट कॉलेज में सीट के लिए 22 लाख रुपए देने का आरोप है. ये फीस उन्होंने 2017 में अपनी भांजी के लिए दी थी.
इसके अलावा सीनियर सीपीआई (M) नेता संदीप यादव पर भी नोटबंदी के दौरान 15 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन करने का आरोप है. वहीं माओवादी नेता अरविंद यादव पर भी अपने भाई के एडमिशन के लिए 12 लाख रुपए देने का आरोप है.
गृह मंत्रालय के अनुसार, जो फंड इकट्ठा किया जाता है उसका एक बड़ा हिस्सा नेता अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए इस्तेमाल करते हैं. एक तरफ जहां माओवादी कैडर जंगलों में अपनी विचारधारा की लड़ाई लड़ रहा है, तो दूसरी तरफ नेता इस प्रकार पैसा खर्च कर रहे हैं.
इस मामले में कार्रवाई करते हुए ईडी ने भी संदीप यादव, अरविंद यादव, प्रद्युमन शर्मा और अन्य माओवादी नेताओं पर केस दर्ज किया है. ईडी ने अभी तक 1.5 करोड़, 32 एकड़ जमीन, 2.45 करोड़ का कैश सीज़ किया है. इनमें से 1 करोड़ रुपए नोटबंदी के समय सीज़ किए गए थे. आपको बता दें कि 2013 में NIA ने भी माओवादी नेता बालमुरी नारायण राव के 1.37 करोड़ रुपए सीज़ किए थे.
गृहमंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि माओवादी नेता लगातार अपने फंड को बढ़ाने के लिए कई सेक्टर के लोगों से वसूली करते हैं. जो नया ग्रुप तैयार किया गया है वो माओवादी नेताओं की इसी गतिविधि पर नज़र रखेगा. इसमें आईबी, एनआईए, इनकम टैक्स, सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों के अफसर हैं.