scorecardresearch
 

लोकसभा में कांग्रेस नेता खड़गे ने किया खबरदार, कहा- संविधान बदला, तो बहेगा खून

लोकसभा में शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन गुरुवार को कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को खबरदार करते हुए एक बड़ा बयान दिया है.

Advertisement
X
कांग्रेस नेता मल्लि‍कार्जुन खड़गे (फाइल फोटो)
कांग्रेस नेता मल्लि‍कार्जुन खड़गे (फाइल फोटो)

लोकसभा में शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन गुरुवार को कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को खबरदार करते हुए एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अंबेडकर का संविधान कभी नहीं बदल सकता जा सकता और ऐसा करने की कोशि‍श भी की जाती है तो देश में भारी 'रक्तपात' होगा.

जवाब में संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने भी कांग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि वह और उनके साथी नेता धमकी देने से बाज आएं.

जानकारी के मुताबिक, खड़गे ने सीधे शब्दों में कहा कि संविधान की दोबारा समीक्षा करने की बात नहीं होनी चाहिए. स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उन्हें भरोसा दिलाया कि संविधान में कोई बदलाव नहीं होगा. बाद में सत्ता पक्ष की आपत्ति‍ के बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही से 'रक्तपात' शब्द को हटाने के आदेश दिए.

Advertisement

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द का राजनीति में सबसे अधिक गलत इस्तेमाल होता है और अगर इसकी जरूरत होती तो संविधान निर्माता संविधान में 'समाजवादी व धर्मनिरपेक्ष' जैसे शब्दों का इस्तेमाल जरूर करते. लोकसभा में 'भारतीय संविधान के प्रति कटिबद्धता' पर बहस की शुरुआत करते हुए सिंह ने अपने भाषण में कांग्रेस पर चुटकी ली और 'असहिष्णुता' पर टिप्पणी को लेकर आमिर खान पर निशाना साधा.

'अंबेडकर ने नहीं की विदेश में बसने की बात'
गृह मंत्री ने कहा कि बीआर अंबेडकर को संविधान का निर्माता समझा गया है, जिन्हें सामाजिक विषमताओं को लेकर अन्याय और उपेक्षाओं का समना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखा व मुद्दे को सच्चाईपूर्वक सामने रखा. राजनाथ ने कहा कि उन्होंने (अंबेडकर) कभी नहीं कहा कि उन्हें भारत में कितनी उपेक्षाएं मिली. उन्होंने कहा कि वह भारत को मजबूत करने के लिए भारत में ही रहेंगे. उन्होंने विदेश में बसने की बात कभी नहीं की.

'पटेल ने देश को एकीकृत किया'
राजनाथ की टिप्पणी को लेकर विपक्षी दलों में बेचैनी दिखी, लेकिन अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है. अपने बयान में राजनाथ सिंह ने कहा कि अंबेडकर देश को एक सूत्र में पिरोने वाले व्यक्ति थे, जबकि पहले केंद्रीय गृह मंत्री वल्लभभाई पटेल देश को एकीकृत करने वाले व्यक्ति थे.

Advertisement

राजनाथ ने कहा कि शब्द 'समाजवादी व पंथनिरपेक्षता' को संविधान में 42वें संविधान संशोधन के तहत जोड़ा गया था. यदि संविधान निर्माताओं को इसकी जरूरत होती तो वे संविधान की प्रस्तावना में ही इसे शामिल करते. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने तब राजनाथ का विरोध करते हुए कहा कि अंबेडकर इन शब्दों को प्रस्तावना में ही शामिल करना चाहते थे, लेकिन उस वक्त के माहौल के कारण वे ऐसा नहीं कर सके थे.

संसद का शीतकालीन सत्र की शुरुआत संविधान दिवस पर चर्चा से हुई है. चर्चा की शुरुआत करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हम संविधान की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं. तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इशारो-इशारों में सरकार पर निशाना साधा.

राजनाथ सिंह ने कहा कि संविधान ने देश को एक दिशा दिखाई. इस संविधान के निर्माण में तमाम लोगों ने अपनी भूमिका निभाई और एक संतुलित समाज दिया. राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर सच्चे अर्थो में एक राष्ट्र ऋषि थे. उन्होंने संविधान के निर्माण में अपने अमूल्य योगदान से देश और समाज को एक दिशा दिखाई.

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement