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गांधी की संतानों के विरोध में नहीं बचा विनय, बस अवज्ञा...अवज्ञा...अवज्ञा

सविनय अवज्ञा यानी बिना किसी को क्षति पहुंचाए, आहत किए, एक लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज किया जाने वाला विरोध, प्रतिरोध. आज से यानी 7 जून 2019 से करीब 126 साल पहले 7 जून 1893 को जब पहली बार महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा का पहला उदाहरण पेश किया था. जब बापू को दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से नीचे फेंका गया था. गांधी ने विरोध किया पर न कोई बदजुबानी की, न ही हिंसा पर उतरे.

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महात्मा गांधी की सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत डांडी यात्रा (फोटो- गेटी)
महात्मा गांधी की सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत डांडी यात्रा (फोटो- गेटी)

सविनय अवज्ञा यानी बिना किसी को क्षति पहुंचाए, आहत किए, एक लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज किया जाने वाला विरोध, प्रतिरोध. आज से यानी 7 जून 2019 से करीब 126 साल पहले 7 जून 1893 को जब पहली बार महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा का पहला उदाहरण पेश किया था. बापू डरबन से प्रीटोरिया जा रहे थे. उनके पास ट्रेन के फर्स्ट क्लास बोगी का टिकट था. लेकिन उन्हें अंग्रेजों ने मारिट्जबर्ग स्टेशन पर उतरने को कहा. महात्मा गांधी बोले - मेरे पास वैध टिकट है. लेकिन अंग्रेज नहीं माने. अंग्रेजों ने कहा कि हम आपको नीचे फेंक देंगे. तब महात्मा गांधी ने जवाब दिया कि बेशक आप मुझे नीचे फेंक दें, पर मैं खुद से नहीं जाऊंगा. बस, यही था सविनय अवज्ञा का पहला उदाहरण. गांधी ने विरोध किया पर न कोई बदजुबानी की, न ही हिंसा पर उतरे.

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फिर 1930 में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों द्वारा भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य प्रदान करने का विरोध करने के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ा. ऐसा विरोध जो अहिंसक था. राजनीतिक फैसलों का विरोध करने के लिए कानूनों को बिना हिंसा के तोड़ने की मुहिम. लेकिन... आज के भारत में गांधी की संतानों के विरोध में विनय बचा ही नहीं है. सिर्फ अवज्ञा ही अवज्ञा दिखती है.

आइए जानते हैं वर्तमान भारत के विरोधों को जिनमें सिर्फ अवज्ञा ही दिखती है...

ममता बोलीं - मोदी को थप्पड़ मारने का मन करता है

लोकसभा चुनाव के दौरान 7 मई को ममता बनर्जी ने कहा कि मैं बीजेपी के नारों में विश्वास नहीं रखती. पैसा मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता. लेकिन जब नरेंद्र मोदी बंगाल आकर कहते हैं कि टीएमसी लुटेरों से भरी पड़ी है तो मुझे उन्हें थप्पड़ मारने का मन हुआ था. मैं खुद को बेचकर राजनीति नहीं करती. मैं मोदी से नहीं डरती, क्योंकि मैं इस तरह की ही जिंदगी जीती हूं.

यूपी के संत कबीर नगर में सांसद ने विधायक को जूते से पीटा

यूपी के संत कबीर नगर में भाजपा के सांसद शरद त्रिपाठी ने अपनी ही पार्टी के विधायक राकेश सिंह पर जूतों की बारिश कर दी. दोनों में किसी बात को लेकर बहस हो रही थी. लेकिन देखते ही देखते यह बहस हाथापाई में तब्दील हो गई. तभी सांसद शरद त्रिपाठी ने पैर से जूता निकाला और विधायक को पीटना शुरू कर दिया. पहले विधायक ने 8-10 जूते खाए और उसके बाद जवाब देते हुए सांसद शरद त्रिपाठी पर थप्पड़ बरसाने शुरू कर दिए.    

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विरोध हिंसा में बदल गई

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पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विरोध के कारण हिंसा होती रही. भाजपा, टीएमसी, लेफ्ट के कार्यकर्ता और नेता मारे गए. राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में  जब भी सत्तारूढ़ पार्टी खुद को कमज़ोर पाती है और कोई नई पार्टी चुनौती देती हुई लगती है तो हिंसा होती ही है. लेकिन इस राजनीतिक विरोध में एकदूसरे का अनादर दिखा.

राजकोट में दलित मजदूर को पीट-पीटकर मार डाला

गुजरात के राजकोट में फैक्ट्री मालिक ने एक दलित मजदूर को पीट-पीटकर मार डाला. ये मामला तब सामने आया जब पिटाई का वीडियो वायरल हुआ. मजदूर को फैक्ट्री के गेट में बांधकर पिटाई की जा रही है. फैक्ट्री मालिक मजदूर को मारते-मारते थक गया तो फिर दूसरा शख्स पिटाई करने लगा. पिटाई से मारे गए मजदूर का नाम मुकेश बताया जा रहा है.

गोरक्षा के नाम पर चार साल में 85 गुंडागर्दी के मामले, 34 लोगों की हत्या

पिछले 4 सालों में मॉब लिंचिंग के 134 मामले हो चुके हैं. सिर्फ गोरक्षा के नाम पर हुई गुंडागर्दी की बात करें तो सरकारी आंकड़े कहते हैं- साल 2014 में ऐसे 3 मामले आए और उनमें 11 लोग ज़ख्मी हुए. 2015 में 10 लोगों को पीट-पीट कर मार डाला. 2016 में गोरक्षा के नाम पर 8 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ीं. 2017 में 11 लोगों की मौत हुई. 2018 में 5 लोग मारे गए.

चुनावी भाषण में असंसदीय भाषा का उपयोग बढ़ता जा रहा है

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राजनीतिक बहस की भाषा असंसदीय हो चुकी है. और ये ट्रेंड पिछले कुछ सालों से बढ़ा है. सोशल मीडिया के आने और प्रचार के अनेकानेक साधन जैसे जैसे बढ़े हैं, नेताओं की भाषा भी गिरी है. 2007 में सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा. फिर मणिशंकर अय्यर ने मोदी की राजनीति को ‘नीच’ स्तर का बताया. मोदी अपने भाषणों में कहते हैं, ‘कांग्रेस के नेताओं ने मुझे कभी चायवाला, नीच, पागल कुत्ता, भस्मासुर, रावण, नाली का कीड़ा, सांप-बिच्छू और न जाने क्या-क्या कहा.’  राष्‍ट्रीय लोकदल पार्टी के नेता अजित सिंह ने नरेंद्र मोदी को ‘बकरी’ बुलाया जो अपने भाषणों में मैं…मैं शब्‍द का प्रयोग करते रहते हैं.

एससी-एसटी एक्ट के विरोध में पूरे देश में हिंसा

मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी और इसके तहत मामलों में तुरंत गिरफ़्तारी की जगह शुरुआती जांच की बात कही थी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले पर स्टे देने से मना कर दिया. इससे नाराज दलित सड़कों पर उतर आए. पूरे देश में कई जगहों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए जिनमें करीब 10 लोग मारे गए. भारत बंद का ऐलान हुआ. इसमें भी व्यापक पैमाने पर हिंसा हुई.  

पद्मावती का विरोधः संजय लीला भंसाली को थप्पड़ मारा, दीपिका को नाक काटने की धमकी

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के विरोध में राजपूतों ने पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन किए. संजय लीला भंसाली को थप्पड़ मारा गया. दीपिका पादुकोण को उनकी नाक काटने की धमकी दी गई. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अटल है. सामान्य तौर पर इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता.

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