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महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का वादा, 'राज्य में होगा पारदर्शी प्रशासन'

पारदर्शी प्रशासन का वादा करते हुए महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि उनकी सरकार लोगों को बेहतर तरीके से सेवाएं मुहैया कराने के लिए एक कानून लाएगी. 44 वर्षीय फड़नवीस प्रदेश में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं.

देवेंद्र फड़नवीस देवेंद्र फड़नवीस

पारदर्शी प्रशासन का वादा करते हुए महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि उनकी सरकार लोगों को बेहतर तरीके से सेवाएं मुहैया कराने के लिए एक कानून लाएगी. 44 वर्षीय फड़नवीस प्रदेश में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं.

उन्होंने मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय को एक महीने के अंदर सेवा का अधिकार विधेयक का प्रारूप तैयार करने का निर्देश दिया है. शपथ लेने के कुछ देर बाद ही मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए फड़नवीस ने कहा, ‘मैंने मुख्य सचिव को कानून का प्रारूप तैयार करने का निर्देश दिया है, एक प्रकार का सिटिजन चार्टर ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया करायी जा सके और ऐसा नहीं होने पर लोग कानूनी रास्ता अख्तियार कर सकें.’

उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में यह फैसला किया गया. सात कैबिनेट और दो राज्य मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा शनिवार को किया जाएगा. फड़नवीस ने कहा, ‘महाराष्ट्र के लोगों को हमसे काफी उम्मीदें हैं और यह एक बड़ी जिम्मेदारी है. विकास पर जोर देते हुए हम एक कुशल और पारदर्शी प्रशासन मुहैया कराएंगे.’

उन्होंने कहा कि चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के ठीक पहले पूर्ववर्ती कांग्रेस-एनसीपी सरकार द्वारा किए गए फैसलों की समीक्षा की जाएगी. फड़नवीस ने कहा, ‘प्रशासन को वापस पटरी पर लाने में समय लगेगा लेकिन हम ऐसा करेंगे. हम महाराष्ट्र को पहले नंबर पर लाएंगे.’

नई सरकार में शिवसेना के शामिल होने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘अमित शाह और उद्धव ठाकरे के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है.’ शपथ ग्रहण समारोह में साधु-संतों की मौजूदगी के बारे में फड़नवीस ने कहा, ‘वे हर धर्म के होते हैं. विश्वास और अंधविश्वास के बीच बारीक रेखा है. हम अंधविश्वास के खिलाफ हैं.’ उन्होंने आश्वासन दिया कि मीडिया की शिकायतों, खासकर पत्रकारों पर हमले की घटनाओं पर गौर किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि राज्य कैबिनेट की बैठकों के बाद नियमित रूप से मीडिया ब्रीफिंग होगी. जब विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री थे तो इस चलन को समाप्त कर दिया गया था.

इनपुटः भाषा से

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