खाली सड़कों पर वाहन की रफ्तार जानलेवा ना हो इसके लिए अलग-अलग इलाको में स्पीडगन तैनात हैं. ज्यादातर का चालान ऑनलाइन उनके घर पहुंच रहा है. रोड सेफ्टी एनजीओ सेव लाइफ फाउंडेशन की रिसर्च बताती है कि लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में 18 लोगों की मौत जानलेवा रफ्तार की वजह से हुई है. जबकि पूरे देश मे 24 मार्च से 4 मई के बीच करीब 137 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हुई है.
सराय काले खां के पास रिंग रोड पर कॉमर्शियल वाहन की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा और प्राइवेट वाहनों की स्पीड लिमिट 80 किलोमीटर प्रति घंटा तय है. लेकिन स्पीडगन में लॉकडाउन के दौरान अधिकतर वाहनों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज हुई है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के ज्वाइंट सीपी एनएस बुंदेला ने कहा, 'ट्रैफिक रूल तोड़ने वालों को ऑनलाइन चालान भेजा जा रहा है.'
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लॉकडाउन में लोग घरों में कैद हैं, सड़कें खाली हैं इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में मौत का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा. सेव लाइफ फाउंडेशन के सीईओ पीयूष पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान हुए सड़क हादसों में करीब 42 मजदूरों की मौत हो चुकी है. ये सभी लोग लॉकडाउन में अपने घरों के लिए रवाना हुए थे. इन सभी की मौत की मुख्य वजह रफ्तार थी. फिर चाहे वो बाइक से टक्कर हो, कार से या फिर ट्रक से.
करीब 17 ऐसे लोगो ने अपनी जान गंवाई है जो आयश्यक सेवाओ जैसे हेल्थकेयर, राशन डिलीवरी या फिर सब्जियों के सप्लाई चेन से जुड़े थे.
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पहले दो लॉक डाउन के दौरान कुल 596 एक्सीडेंट केस दर्ज हुए थे. जिसमें पंजाब (42), केरल (26), दिल्ली (18), कर्नाटक (12), तमिलनाडु (7), असम (3) में मौत दर्ज की गई है.