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LJP ने SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुनर्विचार याचिका

चिराग पासवान ने कहा है कि पहले इस कानून के डर से दलितों के खिलाफ उत्पीड़न और अत्याचार के मामले कम होते थे क्योंकि लोगों को तुरंत गिरफ्तारी और जमानत नहीं मिलने का डर होता था. लेकिन अब नियमों में बदलाव की वजह से ऐसा नहीं हो सकेगा, जिसकी वजह से यह एक्ट बेहद कमजोर हो गया है.

लोक जनशक्ति पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी

SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई और सजा के प्रावधानों में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी गाइडलाइन पर फिर से विचार करने के लिए लोक जनशक्ति पार्टी ने याचिका दाखिल की है. इस पुनर्विचार यचिका में कहा गया है कि मामले को संवैधानिक पीठ के समक्ष भेजा जाए.

अनुसूचित जाति और जनजाति कानून के तहत गिरफ्तारी के नियमों में बदलाव को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में सरकार को जल्द से जल्द कदम उठाने को कहा है. रामविलास पासवान के बेटे और लोक जनशक्ति पार्टी के सेंट्रल पार्लियामेंट्री बोर्ड के चेयरमैन चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है कि एससी/एसटी एक्ट के नियमों में बदलाव की वजह से अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों के मन में काफी आक्रोश है.

तुरंत गिरफ्तारी पर रोक

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ ने अपने फैसले में कहा था SC/ ST एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी. गिरफ्तारी से पहले पुलिस अधीक्षक आरोपों की जांच करेंगे, तब कार्रवाई आगे बढ़ेगी. इस पर लोजपा को आपत्ति है.

नियमों में बदलाव से कमजोर हुआ एक्ट

चिराग पासवान ने कहा है कि पहले इस कानून के डर से दलितों के खिलाफ उत्पीड़न और अत्याचार के मामले कम होते थे क्योंकि लोगों को तुरंत गिरफ्तारी और जमानत नहीं मिलने का डर होता था. लेकिन अब नियमों में बदलाव की वजह से ऐसा नहीं हो सकेगा, जिसकी वजह से यह एक्ट बेहद कमजोर हो गया है. चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री मोदी से अपनी पार्टी की तरफ से अपील की है कि सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करे.

इसके साथ ही लोक जनशक्ति पार्टी ने इस मामले में अपनी तरफ से भी सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करके कोर्ट से इस मामले में पार्टी बनने यानी शामिल होने की अपील की है. लोक जनशक्ति पार्टी इस मामले में पहले से पार्टी नहीं थी, इसीलिए कोर्ट लोक जनशक्ति पार्टी की पुनर्विचार याचिका पर विचार करेगा या इसे रद्द कर देगा यह अभी साफ नहीं है.

याचिका को लेकर लोजपा नेता और सांसद चिराग पासवान की दलील है कि सख्त प्रावधानों के बावजूद दलितों पर अत्याचार बंद नहीं हुआ है. ऐसे में प्रावधानों में ढील खतरनाक हो जाएगी. LJP प्रवक्ता संजय श्रॉफ का भी कहना है कि LJP के बाद जल्द ही सामाजिक संगठन दलित सेना भी सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका लगाएगा.

बढ़ सकता है दलितों का उत्पीड़न

रामविलास पासवान की पार्टी के अलावा रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता रामदास अठावले ने भी अनुसूचित जाति और जनजाति कानून के बारे में सरकार से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को कहा है. उनका भी यह मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस कानून की धार कम हो गई है और इसकी वजह से दलितों के ऊपर उत्पीड़न के मामले बढ़ सकते हैं. रामदास अठावले भी केंद्रीय मंत्री हैं.

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