जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद उनके वकीलों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. मामले को लेकर पिछले दिनों हुई घटनाओं को देखते हुए हाई कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. कन्हैया के वकीलों ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है. हाईकोर्ट इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा.
इसके पहले शुक्रवार सुबह जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट में अपील करने के लिए कहा था. कोर्ट ने कहा कि पहले हाईकोर्ट में याचिका दी जानी चाहिए थी. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कन्हैया को जमानत देने का विरोध किया.
कन्हैया कुमार की ओर से याचिका दाखिल करने वाली अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने याचिका में कहा था कि परिसर में वकीलों के एक समूह ने कन्हैया पर कथित रूप से हमला किया था. वहां का माहौल जमानत याचिका पेश करने के लिए उचित नहीं है. कन्हैया कुमार ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अनुच्छेद 32 के तहत एक नागरिक अपने मौलिक अधिकार सुनिश्चित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है.
रिहाई के लिए रोकी गई ट्रेन
कन्हैया की रिहाई के लिए बिहार के मधुबनी में कुछ लोगों ने दरभंगा-नई दिल्ली संपर्क क्रांति ट्रेन रोक ली. उन्होंने ट्रेन के इंजन पर चढ़कर जमकर नारेबाजी की.
AISF protest at Rajendra Nagar railway station, block Indore – Rajendra Nagar in Patna over
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Left supporter students' groups block Darbhanga-New Delhi Bihar Sampark Kranti Express demanding release of
— ANI (@ANI_news)
मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया दर्द
पटियाला हाउस कोर्ट में दो दिन पहले कन्हैया कुमार की पेशी के बाद की मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, कन्हैया के साथ मारपीट हुई है. उनके दाएं अंगूठे में दर्द है. बाएं पैर और नाक पर भी खरोंच के निशान मिले हैं. इसके अलावा शरीर के बाहरी हिस्से में कोई चोट नहीं मिली, हालांकि कन्हैया ने सीने में दर्द होने की शिकायत भी की थी.

देशभर में हुआ विरोध प्रदर्शन
जेएनयू में अफजल गुरु के समर्थन में कार्यक्रम को लेकर हुए बवाल और देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कन्हैया कुमार की जमानत याचिका दायर किए जाने के बाद गुरुवार को दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार और कर्नाटक में प्रदर्शन हुए. इनमें कन्हैया कुमार को मुक्त करने और उनके खिलाफ देशद्रोह का आरोप हटाने की मांग की गई.
राष्ट्रविरोधी नारे लगाने का है आरोप
28 वर्षीय छात्र नेता कन्हैया को बीते 12 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था. अफजल गुरु को वर्ष 2013 में दी गई फांसी के तीन दिन पूर्व जेएनयू में आयोजित एक कार्यक्रम में उन पर है. अफजल गुरु कश्मीरी आतंकी था और वर्ष 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले की साजिश में शामिल था. कन्हैया ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है.
डीयू के प्रोफेसर को भी भेजा गया जेल
दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एसएआर गिलानी ने भी भारतीय प्रेस क्लब में इसी तरह की बैठक की थी. गिरफ्तार गिलानी को गुरुवार को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. गिलानी और कन्हैया दोनों तिहाड़ जेल में रहेंगे. कन्हैया सीपीआई के छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) के पहले नेता हैं जो के अध्यक्ष बने हैं. कन्हैया को कांग्रेस, वाम दल और दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी का समर्थन प्राप्त है.
बस्सी ने कहा था- कन्हैया के खिलाफ हैं सबूत
दिल्ली के पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने इस बात से इनकार किया है कि बुधवार को अदालत में कन्हैया पर हमला हुआ था. उन्होंने कन्हैया पर लगे देशद्रोह के आरोप को जायज ठहराया और कहा कि पुलिस के पास इसे साबित करने के लिए सबूत हैं.