जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार के नजरिए में स्पष्ट बदलाव दिख रहा है. पिछले तीन साल से अलगाववादियों और आतंकियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाली मोदी सरकार ने अलगाववादियों और आतंकियों के खिलाफ अपने दृष्टिकोण में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं.
आजतक के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में ने कहा कि अलगाववादियों और बंदूक उठाने वाले भटके नौजवानों को सही रास्ते का चुनाव करना चाहिए और विकास-प्रगति का हिस्सा बनना चाहिए.
घाटी में बंदूक उठाने वाले आतंकियों के बारे में पूछे गए एक सवाल के बारे में रक्षामंत्री ने कहा कि भटके नौजवानों और अलगाववादियों को विकास का हिस्सा बनना चाहिए.
पहलगाम स्थित जवाहर लाल नेहरू माउंटेनियरिंग संस्थान के दौरे पर जम्मू कश्मीर पहुंचीं निर्मला सीतारमन ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास और प्रगति के लिए सभी को समान मौके मुहैया कराने के लिए काम करती रहेगी. रक्षामंत्री ने यहां जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से भी मुलाकात की.
मोदी सरकार ने पिछले महीने दिनेश्वर शर्मा को कश्मीर में वार्ता के लिए नियुक्त किया है. पूर्व आईबी चीफ रहे दिनेश्वर शर्मा को कश्मीर में मौजूद सभी पक्षकारों से बात करने की छूट है. वे घाटी में विभिन्न धड़ों से मिल रहे हैं.
दिनेश्वर शर्मा का कहना है कि वे अलगाववादियों से भी बात करेंगे, लेकिन अलगाववादियों ने पत्र जारी कर दिनेश्वर शर्मा से बात न करने बयान दिया है.
ध्यान रखने वाली बात ये है कि भारतीय सेना ने घाटी में 'ऑपरेशन ऑलआउट' के तहत सैकड़ों आतंकी मारे हैं. इनमें बुरहान वानी से लेकर लश्कर और हिज्बुल के तमाम बड़े कमांडर शामिल हैं.
देखने वाली बात ये है कि जम्मू कश्मीर पर केंद्र सरकार का बदला रवैया क्या रंग लाता है.