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जैश के आतंकी ने कहा- PAK लड़ाकों ने किया था पठानकोट में हमला

जैश के लड़ाके सैफुल्लाह खालिद ने कहा कि हमले में जैश-ए-मोहम्मद, अल रहमत का हाथ हो या नहीं, लेकिन पक्के तौर पर वे मुजाहिदीन थे और पाकिस्तान से जुड़े थे.

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पठानकोट हमले में शहीद हुए थे 7 जवान पठानकोट हमले में शहीद हुए थे 7 जवान

पाकिस्तान की सरकार जहां पठानकोट आतंकी हमला मामले में भारत के इनपुट पर कार्रवाई करते हुए जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है, वहीं जैश के एक लड़ाके ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के मुजाहिदीन भारत पर हमले जारी रखेंगे.

अंग्रेजी अखबार 'हिंदुस्तान टाइम्स' से फोन पर बातचीत में जैश के लड़ाके सैफुल्लाह खालिद ने कहा कि हमले में जैश-ए-मोहम्मद, अल रहमत का हाथ हो या नहीं, लेकिन पक्के तौर पर वे मुजाहिदीन थे और पाकिस्तान से जुड़े थे. उसने कहा, 'हम कश्मीर में अपना जिहाद जारी रखेंगे.'

गौरतलब है कि पठानकोट हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद और उसके छद्म संगठन अल रहमत ट्रस्ट का हाथ सामने आया है. गुलाम कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद से बातचीत में खालिद ने बताया कि वह जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने वाले पाकिस्तानी लड़ाकों में से एक है और अब अल रहमत से जुड़ा है. खालिद जम्मू-कश्मीर में पकड़ा गया था और 14 साल की जेल पूरी करने के बाद उसे 2007 में पाकिस्तान वापस भेज दिया गया.

'हम पर पहले भी पाबंदी थी'
सियालकोट में छापेमारी के बीच खालिद ने पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई को दरकिनार किया है. उसने कहा, 'हम पर पहले भी पाबंदी थी. आगे भी हमें कोई उम्मीद नहीं है, लेकिन हमारा जिहाद जारी रहेगा.' खुफिया एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि खालिद का रवैया दिखाता है कि पाकिस्तान सेना के संरक्षण के कारण आतंकी कितने आत्मविश्वास में हैं.

बालाकोट में है जैश का ट्रेनिंग कैंप
शनिवार को हुई बातचीत में आतंकी ने खुलासा किया कि जैश का खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट इलाके में प्रशिक्षण शिविर है, लेकिन बहावलपुर में सिर्फ संगठन अपनी सभाएं करता है. उसने बताया कि समय-समय पर जैश अपने कैंपों की जगह बदलता रहता है. उसने कहा कि जरूरत के मुताबिक, कैंपों की तादाद घटती-बढ़ती रहती है.

खालिद का मोबाइल नंबर अल रहमत के एक पंपलेट से मिला था. हालांकि पंपलेट पर दिए गए ज्यादातर फोन नंबर अब बंद हैं. 30 मिनट की बातचीत में खालिद ने मसूद अजहर के साले मौलाना अश्फाक अहमद का नंबर भी मुहैया करवाया. अश्फाक भी पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में है.

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