भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( ) ने कहा है कि तीसरे लांच पैड के निर्माण का फैसला दीर्घकालिक कार्य योजना को पूरा करने के बाद लिया जाएगा, हालांकि तीसरे लांच पैड के निर्माण स्थल को चिह्न्ति कर लिया गया है.
इसरो के अध्यक्ष ए.एस.किरण कुमार ने कहा कि हमारा तत्काल ध्यान दूसरे रॉकेट का निर्माण कार्य पूरा करने पर है इसके बाद हम रॉकेट लांचिंग की संख्या बढ़ा सकते हैं. तीसरे लांच पैड के निर्माण का फैसला दीर्घकालीन कार्य योजना को पूरा करने के बाद लिया जाएगा.
वर्तमान में इसरो के पास दो रॉकेट, भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान ( ) -एमके2 तथा ध्रुवीय उपग्रह अंतरिक्ष यान (पीएसएलवी5) तथा आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में दो लांच पैड हैं. निर्माणाधीन भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क3 के लिए अतिरिक्त लांचिंग सुविधा के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि प्रारंभिक दो जीएसएलवी-एमके3 रॉकेटों को दूसरे लांच पैड से छोड़ा जाएगा. जीएसएलवी-एमके3 रॉकेटों को दिसंबर 2016 में प्रक्षेपण के लिए तैयार होने की संभावना है.
उधर, राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो ने तीसरा लांच पैड श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) में स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा, लांच पैड सुविधा के अधिकतम उपयोग के मद्देनजर तीसरे लांच पैड के लिए संभावित स्थान की पहचान श्रीहरिकोटा में कर ली गई है.
एसडीएससी के निदेशक एम.वाई.एस.प्रसाद ने कहा, "जीएसएलवी-एमके3 से अधिक बड़े रॉकेट के विकास तथा एडवांस फ्यूचर रॉकेट को ध्यान में रखते हुए इसरो को नए लांच पैड की जरूरत महसूस हुई है. उल्लेखनीय है कि भारत का वर्तमान रॉकेट लगभग 45-50 मीटर लंबा है, जबकि भविष्य का रॉकेट 60-65 मीटर लंबा और कहीं ज्यादा भारी होगा. प्रसाद के मुताबिक, तीसरे लांच पैड पर रिपोर्ट इसरो के सभी केंद्रों के अधिकारियों के साथ अध्ययन दल द्वारा तैयार कर ली गई है.
- इनपुट IANS