इराक के मोसुल में मारे गए 39 भारतीय मजदूरों के परिवारों को केंद्र सरकार की ओर से 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है. इस मुआवजे का ऐलान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है. वहीं उनकी मौतों को लेकर कई तरह के दावें किए गए हैं. हालांकि अब इराक की सरकार द्वारा जारी डेथ सर्टिफिकेट से उनकी मौत की असल वजह का पता चल गया है.
पहले खबर यह थी कि मोसुल पर कब्जा हटने के बाद आतंकी इन अगवा भारतीयों को अपने साथ बद्दूस ले गए थे. वहां पर इनको जेल में बंद कर दिया था. उसी दौरान जेल पर हमला हुआ था और उसमें इन की मौत हो गई. हालांकि डेथ सर्टिफिकेट के अनुसार इन भारतीय मजदूरों 2014 में ही बहुत नजदीक से यानी कि सर पर गोली मारी गई थी, जिससे इनकी मौत हुई.


बलवंत राय और हेमराज के DNA और फॉरेंसिक जांच की जो फाइनल रिपोर्ट है, वह साफ कहती है कि दोनों की मौत 2014 में ही सर पर गोली मारकर हुई है. गौरतलब है कि भारत सरकार ने 2017 में अगवा सभी भारतीयों के परिजनों के डीएनए सैंपल लिए थे. मार्च 2018 में भारतीय दूतावास के माध्यम से इन सैंपलों को इराक सरकार को सौंपा गया था और बद्दूस में मिले शवों के साथ इनका DNA मैच किया गया था. अब यह भी साफ हो गया है की ISIS ने इन अगवा भारतीयों को नजदीक से गोली मारी थी.



आपको बता दें कि इराक के मोसुल में मारे गए 39 भारतीयों की मौत को लेकर भारत सरकार के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक अर्जी लगाई गई है. इसमें कहा गया है कि मौत के लिए भारत सरकार दोषी है. लिहाजा कोर्ट अपनी निगरानी में एक कमेटी बनाकर इस पूरे मामले की जांच कराए. यह अर्जी वकील महमूद प्राचा की तरफ से लगाई गई है.