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रेलवे ने शुरू किया हाईटेक सिक्योरिटी सिस्टम का इस्तेमाल

भारतीय रेलवे ने अपने ट्रैक की देखरेख और रेल यातायात को और ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है. दक्षिण रेलवे के 68 किलोमीटर लंबे रूट पर ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम(टीपीडब्ल्यूएस) की शुरुआत की गई है.

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रेल यात्रा अब होगी और सुरक्षित रेल यात्रा अब होगी और सुरक्षित

भारतीय रेलवे ने अपने ट्रैक की देखरेख और रेल यातायात को और ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है. दक्षिण रेलवे के 68 किलोमीटर लंबे रूट पर ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम(टीपीडब्ल्यूएस) की शुरुआत की गई है. सुरक्षा की ये तकनीक अब तक यूरोपीय देशों में इस्तेमाल की जाती थी. भारत में ऐसा फ्रांस की जानी-मानी कंपनी थैलेस के सहयोग से संभव हो सका है.

चेन्नई के एंबटूर स्टेशन पर इस नए सिस्टम से लैस सेक्शन का उद्घाटन रेलवे बोर्ड के सिगनल एंड टेली कम्युनिकेशन के महानिदेशक अखिल अग्रवाल ने किया. ये सिस्टम बेसिन ब्रिज जंक्शन से अराक्कोनम सेक्शन के बीच लगाया गया है. थैलेस का ये सिस्टम यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) लेवल 1 के नाम से जाना जाता है और यूरोपीय देशों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. सितंबर 2014 में दक्षिण रेलवे ने थैलेस को ये कॉन्ट्रैक्ट दिया था.

भारत में थैलेस के लिए ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन के प्रभारी निदेशक रविप्रकाश करचेरला के मुताबिक यात्रियों की सेफ्टी और ट्रेनों की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और हमें गर्व है कि हम इस प्रोजेक्ट के जरिए भारतीय रेलवे में एडवांस और सक्षम ट्रेन सुरक्षा सिस्टम लाए हैं. उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के जरिए जहां रेल यात्रा सुरक्षित होगी, वहीं इसके जरिए ट्रेन अपनी और तेजी से ट्रैक पर दौड़ सकेंगी जिससे यात्रा में लगने वाला समय बचेगा.

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