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उच्च श्रेणी के रेलवे यात्री किराये में वृद्धि संभव

रेल यात्रियों को उच्च श्रेणी में यात्रा के लिए आने वाले समय में अंटी ढीली करनी पड़ सकती है. रेलवे यात्री किराये में वृद्धि की संभावना पर विचार कर रहा है ताकि वित्तीय समस्याओं से निपटने तथा सुरक्षा संबंधी ढांचागत सुविधाओं में सुधार के लिये धन जुटाने में मदद हो सके.

रेल यात्रियों को उच्च श्रेणी में यात्रा के लिए आने वाले समय में अंटी ढीली करनी पड़ सकती है. रेलवे यात्री किराये में वृद्धि की संभावना पर विचार कर रहा है ताकि वित्तीय समस्याओं से निपटने तथा सुरक्षा संबंधी ढांचागत सुविधाओं में सुधार के लिये धन जुटाने में मदद हो सके.

रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने किराया बढाने की योजना का ब्यौरा नहीं दिया. उन्होंने कहा, ‘अभी इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया और फिलहाल इस पर केवल विचार किया जा रहा है.’ पर रेलवे बोर्ड के सूत्रों ने संकेत दिया कि यह बढ़ोतरी ईंधन की लागत के साथ जोड़ी जा सकती है.

सूत्रों ने कहा कि किराये में वृद्धि को डीजल तथा बिजली समेत ईंधन कीमत से जोड़ा जा सकता है. रेलवे के कुल सालाना व्यय में ईंधन पर खर्चा करीब 18 प्रतिशत है. जुलाई महीने में रेल मंत्री का पदभार संभालने के तुरंत बाद उन्होंने कहा था, ‘सामान्य वर्ग को प्रभावित किये बिना किराये में बढ़ोतरी पर विचार किया जाएगा.

सामान्य वर्ग का इस्तेमाल आमतौर पर गरीब लोग करते हैं जिनकी भुगतान करने की क्षमता को ध्यान में रखा जाएगा.’ योजना आयोग चाहता है कि रेलवे अपनी आय बढाने के लिए भाड़े की दरें तर्कसंगत करे. पिछले करीब आठ साल से किराये में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

रेल मंत्री ने पिछले महीने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में योजना आयोग की पूर्ण बैठक में माल भाड़ा तथा यात्री किराये को बाजार मूल्य से जोड़े जाने का प्रस्ताव दिया था. रेलवे की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है.

देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने हाल में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रेलवे यात्री सेवा तथा अन्य कोचिंग सेवाओं के परिचालन लागत को पूरा करने में असमर्थ है. वित्त वर्ष 2008-09 में यात्री तथा अन्य कोचिंग सेवाओं के परिचालन से रेलवे को 15,268 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. इसेस पूर्व वित्त वर्ष में यह 7,493 करोड़ रुपये था. वित्त वर्ष 2009-10 में एसी चेयर कार तथा एसी 3-टियर को छोड़कर सभी श्रेणियों में रेलवे को नुकसान हुआ.

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