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एनपीटी पर हस्‍ताक्षर नहीं करेगा भारत

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव को मानने से इंकार किया है जिसमें एनपीटी के दायरे में नहीं आने वाले सभी देशों से इस संधि पर हस्ताक्षर करने को कहा गया है.

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव को मानने से इंकार किया है जिसमें परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के दायरे में नहीं आने वाले सभी देशों से इस संधि पर हस्ताक्षर करने को कहा गया है. भारत ने कहा कि वह बाहर से सुझाये गए ऐसे किसी नियम या मापदंड को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो या सम्प्रभुता का उल्लंघन करते हों.

भारत परमाणु परीक्षण का नहीं है पक्षधर
भारत ने कहा कि वह एनपीटी में गैर परमाणु हथियार सम्पन्न देश के रूप में शामिल नहीं हो सकता है हालांकि उसने परमाणु परीक्षण नहीं करने और पहले हथियार का उपयोग नहीं करने की बात पर जोर दिया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष सूसन ई राइस को लिखे पत्र में वहां भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप पुरी ने भेदभाव रहित सार्वभौम परमाणु अप्रसार पर जोर दिया.

एनपीटी को नहीं स्‍वीकार सकता है भारत
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप पुरी ने अपने पत्र में कहा कि भारत सभी देशों के एनपीटी को स्वीकार करने की बात को नहीं मान सकता है. यह बात ऐसे समय में उभर कर सामने आई है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास कर परमाणु अप्रसार संधि के समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले सभी देशों से इसे स्वीकार करने को कहा था.

संसद में 29 जुलाई को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का हवाला देते हुए पुरी ने कहा कि भारत के गैर परमाणु हथियार सम्पन्न देश के रूप में एनपीटी पर हस्ताक्षर करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है. परमाणु हथियार भारत की सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है और आगे भी यह बना रहेगा. उन्होंने कहा कि भारत इस विषय में बाहर से थोपे गए नियमों या मानदंडों को स्वीकार नहीं करेगा जो संसद के अधिकार क्षेत्र में आते हैं या भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुरूप हैं अथवा भारत के राष्ट्रीय हितों या सम्प्रभुता का उल्लंघन करते हैं. पुरी ने कहा कि भारत परमाणु अप्रसार की बाध्यताओं को नहीं मानेगा जिसपर उसने सहमति व्यक्त नहीं की.

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