इंडिया टुडे ग्रुप के लोकप्रिय और चर्चित कार्यक्रम 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2019' का आगाज हो गया है. 'सिटीजन कौन- एनआरसी बनाम नागरिकता संशोधन अधिनियम' सेशन में बीजेपी नेता चंद्र बोस, AIUDF नेता अमीनुल इस्लाम, जादवपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी के प्रोफेसर मोनोजीत मंडल, सुप्रीम कोर्ट के वकील उपमन्यु हजारिका और सुप्रीम कोर्ट के सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग के पूर्व प्रमुख कृष्ण महाजन ने अपनी राय रखी. मंच का संचालन राहुल कंवल, न्यूज डायरेक्टर, टीवी टुडे नेटवर्क ने किया.
देश में इस समय हॉट टॉपिक बने इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी राय रखते हुए एआईयूडीएफ नेता अमीनुल इस्लाम ने कहा कि असम में 80 के दशक में असम मूवमेंट हुआ, उसमें करीब 10 हजार लोग मारे गए. उसके बाद असम अकॉर्ड 1985 आया. उसमें विदेशियों की पहचान करने के लिए फिक्स डेट था 25 मार्च 1971. उसके आधार पर सिटीजनशिप एक्ट लागू हुआ. सवाल यह है कि असम में एनआरसी हो चुका है, अब सब क्लियर है कि कितने मुस्लिम बांग्लादेश से आए, और विदेशी हैं. लेकिन यह भी सामने आया कि 12 लाख हिंदू एनआरसी में शामिल नहीं हो पाए.
जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या आपकी पार्टी ने लोगों को अवैध कागजात बनवा कर दिए ताकि वे आपके लिए वोट कर सकें तो उन्होंने कहा कि कोई 51, 62 या बाद के पेपर नहीं बना सकता वे सब लोग भारतीय नागरिक थे. अब लोग कह रहे हैं कि वो कागजात झूठे थे. बांग्लादेश बनने के बाद मुस्लिम लोग भारत क्यों आए, यह सवाल है. गृह मंत्री ने कहा कि 31 फीसदी बंगाली हिन्दू बांग्लादेश में हैं. बांग्लादेश में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. दोबारा सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी ने किसी की मदद नहीं की. वहां लोग प्रताड़ित किए जा रहे थे.
अमीनुल इस्लाम ने आगे कहा कि असम में एनआरसी की प्रक्रिया हो चुकी है. यह बीजेपी की सरकार में हुआ. यह सुप्रीम कोर्ट के सुपरविजन में हुआ. असम के 56 हजार कर्मचारी इस एनआरसी प्रक्रिया में लगे रहे. 5 साल तक वो लगातार यही काम करते रहे. अब यह हो चुका. 19 लाख लोग जो सामने आए यह करीब 50 देशों की पूरी जनसंख्या से भी ज्यादा है. अब अगर पूरे देश में देखें तो यह संख्या करोड़ में हो सकती है इसलिए यह हो रहा है. हम सुप्रीम कोर्ट की मंशा पर संदेह नहीं कर सकते. लेकिन इसमें करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं. कई करोड़ कागजातों की जांच हो चुकी है. अब फिर आगे यह 5-6 सालों से किया जाए तो यह सही नहीं लग रहा.