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Conclave 2016: अमित शाह बोले- राहुल का JNU जाना गलत नहीं, समर्थन करना गलत

शाह ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका जेएनयू जाना गलत नहीं था. लेकिन जिस तरह वहां जाकर उन्होंने भाषण दिया और नारेबाजी कर रहे छात्रों का समर्थन किया, वह गलत है.

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कॉन्क्लेव में अमित शाह
कॉन्क्लेव में अमित शाह

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव- 2016 में गुरुवार को पहले दिन के आखि‍री सत्र में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि देश की अखंडता को कोई तोड़ नहीं सकता, लेकिन अगर कोई नारेबाजी करके या कुछ करके देश की एकता-अखंडता को नुकसान पहुंचाने की कोशि‍श करेगा तो हम उसका विरोध जरूर करेंगे.

शाह ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका जेएनयू जाना गलत नहीं था. लेकिन जिस तरह वहां जाकर उन्होंने भाषण दिया और नारेबाजी कर रहे छात्रों का समर्थन किया, वह गलत है.

सवाल: भारत माता की जय न बोलना देशद्रोह है?
शाह: भारत माता की जय' का नारा बीजेपी और आरएसएस की स्थापना के वर्षों पहले से बना है. इस बात पर बहस करना बेकार है. 99 फीसदी लोग मानते हैं कि भारत माता की जय बोलना देश का सम्मान है. बीजेपी ने कभी ये नहीं कहा कि किसी से भारत माता की जय जबरन बुलवाया जाए. पार्टी ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं करती और न ही कोई नेता ऐसे बयान दे रहा है.

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सवाल: क्या ओवैसी देशद्रोही हैं?
शाह: एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी एक बयान देकर देशद्रोही नहीं हो गए. उन्हें समझाने की जरूरत है और हम समझाएंगे.

सवाल: जेएनयू में नारे लगाकर छात्र देशद्रोही?
शाह: अफजल गुरु की बरसी मनाना और आतंकवादी के समर्थन में नारे लगाना देशद्रोह है. 9 फरवरी को जो हुआ वह देशद्रोह है. कोई भी देश के खिलाफ बोलेगा उसका विरोध करेंगे.

सवाल: कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी कश्मीरी छात्रों को जानबूझकर नहीं पकड़ रही?
शाह: अफजल गुरु की बरसी मनाना देशद्रोह है. हमें अगर दोषियों को गिरफ्तार न करना होता तो केस क्यों दर्ज करते.

सवाल: पीडीपी अफजल गुरु को आतंकी नहीं मानती. वह फांसी का विरोध करती है, फिर उसका साथ क्यों?
शाह: हमने पीडीपी के साथ शर्तों पर गठबंधन किया है और उसके खास प्रावधान हैं. उसकी सीमाएं तय हैं. वह राज्य की जनता के हित में लिया गया फैसला है. कांग्रेस ने भी मुस्लिम लीग से गठबंधन किया था, उस पर सवाल क्यों नहीं उठे.

सवाल: क्या मोदी-अमित शाह या बीजेपी के खिलाफ बोलने पर रोक है?
शाह: लोग यह भी लिख रहे हैं कि अगर मोदी मर जाएं तो फलां व्यक्ति को पीएम बना देंगे. मोदी जी को लोगों ने तानाशाह, हत्यारा, अपराधी, नरसंहारक कहा, लेकिन हमने कुछ नहीं कहा. कोर्ट का कोई फैसला मोदी के खिलाफ नहीं था. व्यक्ति के खिलाफ सब सुनेंगे, देश के खिलाफ कुछ नहीं सुन सकते.

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सवाल: क्या संघ के एजेंडे को बीजेपी थोपने की कोशिश कर रही है?
शाह: यह लोकतंत्र है. यहां किसी पर कुछ थोपा नहीं जा सकता. कांग्रेस वाले भी कहते हैं आपमें असहिष्णुता है. गूगल पर सोनिया जी का कार्टून आया था तो कांग्रेस ने गूगल पर कार्रवाई की. लेकिन तब किसी ने हंगामा नहीं किया. सरकार के खिलाफ है तो ठीक है. लेकिन देश के खिलाफ है तो हम बोलेंगे. कांग्रेस के लोग यहां तक कि राहुल गांधी जेएनयू गए, वहां जाकर भाषण दिया. जेएनयू जाना गलत नहीं है. लेकिन उन्होंने वहां क्या कहा, लोग आपकी आवाज को दबाना चाहते हैं. मैं आपके साथ हूं.

राहुल कंवल: लेकिन राहुल गांधी ने नारेबाजी को समर्थन नहीं किया.
शाह: तो उनका मतलब क्या था. आपकी आवाज को दबाया जा रहा है. मैं आपके साथ हूं. देखिए स्वर कितना है और लाउड स्पीकर कौन लगाता है. अभी आगरा में एक दलित युवक की हत्या हो गई. लेकिन किसी एक व्यक्ति‍ ने वहां जाकर कुछ कह दिया, ये महत्वपूर्ण हो गया. परसों हमारे कार्यकर्ता को केरल में इस तरह मारा गया कि जीवन भर पैरालिसिस रहेगा. कम्युनिस्ट पार्टी वालों ने अटैक किया है, लेकिन किसी ने हंगामा नहीं किया.

मैं छात्र रोहित की मौत को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण मानता हूं. लेकिन रोहित से पहले भी 9 दलित और अन्य बच्चों ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में आत्महत्या की. किसी ने हंगामा नहीं किया. मतलब कि आवाज बड़ी नहीं है, लाउडस्पीकर कौन लगा रहा है. विरोध तो करना ही चाहिए. युवा हैं तो ऐसा होता ही है. लेकिन यह कहना है कि सोचने की, बोलने की पाबंदी लगी है, ये गलत है.

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सवाल: बिहार के चुनाव में पार्टी का यह हाल क्यों हुआ?
शाह: बिहार की जनता ने हमें स्वीकार नहीं किया. मध्यप्रदेश में लोकल बॉडी जीत गई. केरल में त्रिपुरा में हमारे वोट में बढ़ोतरी हुई. राजस्थान में हमने क्लीन स्वीप किया.

सवाल: आपको चुनावी जादूगर कहा गया, दिल्ली और बिहार में हार के बाद आपके औरा में कमी आई है?
शाह: कोई भी जीत या हार, हजारों-हजारों कार्यकर्ताओं के परिश्रम से होती है. आज मेरा पद है इसलिए यहां बैठा हूं. मैं 13 साल का था तब से संघ में हूं और 49 साल की उम्र तक कोई इंटरव्यू नहीं दिया. इन जीतों में मेरे अकेले का श्रेय नहीं.

सवाल: सोनिया गांधी से आपके रिश्ते ठीक क्यों नहीं हैं?
शाह: रिश्ते ठीक नहीं हैं, ये ठीक ही है. मेरी ओर से ठीक नहीं हैं, उनकी ओर से पता नहीं.

सवाल: वो कहते हैं कि बीजेपी में एरोगेंस है?
शाह: ऐसा कुछ नहीं है. कोई कुछ भी बोल सकता है, पूछ सकता है. मैं पार्टी नहीं हूं. मैं तो कैबिनेट में भी नहीं हूं. मोदी जी हैं, जेटली जी हैं, वेंकैया जी हैं ये उनका काम है.

सवाल: 2014 के चुनाव के बाद आपने कहा कांग्रेस मुक्त भारत होगा?
शाह: 2014 के चुनाव के बाद महाराष्ट्र में कांग्रेस का शासन था. हम वहां सत्ता में आए. झारखंड में यही हुआ. कश्मीर में, हरियाणा में यही हुआ. बिहार में वो आज भी हमसे पीछे है. कांग्रेस मुक्त हो रहा है. ठीक से चल रहा है. परिश्रम कर रहा हूं. 2019 तक हो जाएगा. मेरा दायित्व है छोटे से छोटे कार्यकर्ता को उत्साह और कंधे से कंधे मिलाकर उसका साथ देना.

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सवाल: बिहार में लोग कह रहे थे बाहर से आकर राजनीति कर रहे हैं?
शाह: ये मेरे लिए नहीं था. ये राहुल गांधी के लिए था. हम तो इसी देश के हैं.

सवाल: सुब्रमण्यम स्वामी ने राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता को लेकर सवाल किया, कोर्ट गए इस बारे में क्या कहेंगे?
शाह: वो स्वतंत्र विचारक हैं. हमारी पार्टी के हैं, लेकिन उनके विचार उन तक हैं. उससे पार्टी का लेना देना नहीं है.

सवाल: पांच राज्यों में चुनाव पर क्या कहेंगे?
शाह: आगे पांच राज्यों में चुनाव है. हमारी पहली कोशिश है जनाधार बनाना. मेरे लिए कोई चुनाव हारने का चुनाव नहीं होता. चाहे बंगाल हो या केरल हो हमारे कार्यकर्ताओं पर हमला हो रहा है, ये ब‍ताता है कि बीजेपी का खौफ है.

सवाल: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी परेशान हैं, अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय का मुद्दा जोरों पर है?
शाह: वह अल्पसंख्यक विश्वविद्याल नहीं है. सेंट्रल यूनिवर्सिटी है. रिजर्वेशन लागू हो ये हमारी मांग है.

सवाल: यूपी में जब चुनाव होंगे, तो क्या आप राम मंदिर का मुद्दा फिर जोर शोर से उठाएंगे?
शाह: बीजेपी के चुनावी घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण है. उम्मीद है उस दिशा में आगे बढ़ेंगे.

सवाल: कालाधन और रोजगार जैसे मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए देशद्रोह और ऐसे मुद्दे उछाले जा रहे हैं?
शाह: जेएनयू में नारे बीजेपी ने नहीं लगाए. हमने रोजगार के लिए मुद्रा बैंक के तहत बड़ी संख्या में लोगों को लोन दिया है. मैं सरकार के कामकाज से संतुष्ट हूं. गड्ढा इतना बड़ा है कि भरने में समय लगेगा.

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सवाल: जाट आंदोलन के दौरान हिंसा हुई, इस बारे में क्या कहेंगे?
शाह: कई बार ऐसी परिस्थिति आ जाती है. इसको बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है. ये पार्ट ऑफ सोशल लाइफ है.

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