scorecardresearch
 

तब भागने दिया था भारत में जासूसी कर रही अमेरिकी महिला राजनयिक को

अमेरिका में भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के साथ बदसलूकी पर देश में गुस्‍सा है. अमेरिका के प्रति भारतीय रुख फिलहाल कड़ा है लेकिन आज से सात साल पहले भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय की जासूसी करने के बावजूद एक अमेरिकी जासूस को भागने में मदद किए जाने का मामला सामने आया है.

Advertisement
X
भारत-अमेरिका
भारत-अमेरिका

अमेरिका में भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के साथ बदसलूकी पर देश में गुस्‍सा है. अमेरिका के प्रति भारतीय रुख फिलहाल कड़ा है लेकिन आज से सात साल पहले भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय की जासूसी करने के बावजूद एक अमेरिकी जासूस को भागने में मदद किए जाने का मामला सामने आया है.

अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार अमेरिकी जासूस ने सिर्फ पीएम ऑफिस बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) की भी जासूसी की, जबकि पकड़े जाने के बावजूद भारत सरकार ने ही उसे भागने में मदद की. घटना 2006 की है, जिसमें जासूस रोजाना मिनचियू और उसके एक साथी के फरार होने की बात की गई है.

रॉ और इंटेलिजेंस ब्‍यूरो में किया था काम
हालांकि मिनचियू नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में थर्ड सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत थी, लेकिन वह मूल रूप से एक जासूस थी. वह लंबे समय तक भारतीय जासूसी संगठन रॉ, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एनएसए और मिलिटरी इंटेलिजेंस में भी कार्यरत थी. इनमें एनएसए ऐसा विभाग है जो संवेदनशील सूचनाएं इकट्ठा करता है और प्रधानमंत्री को जवाबदेह है.

इधर चार्टशीट दाखिल, उधर फरार
अखबार के मुताबिक मिनचियू कोलकाता और मुंबई स्थित अपने मुखबिरों से सूचनाएं मंगवाती थी. उसने एनएससीएस के एक ऑफिसर एसएस पॉल को अपनी साथी अमेरिकी महिला ऑफिसर से भी मिलवाया था. बाद में भारतीय अधिकारियों को मिनचियू की गतिविधियों के बारे में चल गया, लेकिन जब दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की तो वह फरार हो गई. हैरानी की बात यह है कि उसके भागने में भारत सरकार ने ही व्यवस्था की.

Advertisement

मामले में दिल्ली पुलिस ने एनएससीएस के अधिकारी मुकेश सैनी को हिरासत में ले लिया. उस पर देश की सूचनाएं अमेरिका को देने का आरोप था. बाद में दिल्ली पुलिस ने रिटायर्ड ब्रिगेडियर उज्जवल दासगुप्ता और एसएस पॉल को भी गिरफ्तार किया गया था.

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक दसगुप्ता और सैनी 2005 के सितंबर में मिनचियू से कम से कम 15 बार मिले. दोनों वरिष्‍ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी से पता चलता है कि अमेरिकी जासूस किस तरह भारत की जासूसी कर रही थी.

Advertisement
Advertisement