पुलिस के चेहरे पर भी दहशत नजर आती है. लेकिन ऐसा विरले ही देखने को मिलता है. बताते हैं कि ऐसा नजारा अनंत सिंह की गिरफ्तारी के दौरान दिखा.
हो भी क्यों न? अब तक अनंत को छूने की किसी पुलिसवाले की हिम्मत तक न होती थी. जिस लाव लश्कर के साथ पुलिस अनंत की गिरफ्तारी के लिए पहुंची थी, ऐसा सिर्फ नक्सल ऑपरेशन में ही देखने को मिलता है.
अनंत सिंह अपने समर्थकों में छोटे सरकार के नाम से जाने जाते हैं. कि वहां उनकी समानांतर सत्ता चलती है.
तो क्या अनंत सिंह की गिरफ्तारी एक सामान्य पुलिस कार्रवाई नहीं है? क्या ये पुलिस के कंधे पर बंदूक रख कर की गई ?
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