बिहार के पू्र्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी कहीं बीजेपी के लिए बोझ तो नहीं बनने जा रहे हैं? बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन का औपचारिक हिस्सा बनने के बाद जिस तरह के बयान मांझी के आ रहे हैं उससे तो ऐसा ही लगता है.
1. एक दिन, मांझी ने कहा कि एनडीए को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं घोषित करना चाहिए बल्कि चुनाव बाद सीटों के हिसाब से इसका फैसला होना चाहिए. हालांकि, बाद में मांझी ने कह दिया कि उन्हें एनडीए का मुख्यमंत्री मंजूर होगा. तो क्या मांझी परोक्ष रूप से को लेकर बहस छेड़ना चाहते हैं. ऐसा लगता है मांझी चाहते हैं कि ये बहस आगे बढ़े फिर वो बताएं कि एक दावेदार तो वो भी हैं. अगर ऐसा है तो रिश्ता कितना लंबा होगा कहना मुश्किल है.
2. मांझी के बयानों पर गौर करें तो लगता है उनका एक ही मिशन है - . वो बात भले कुछ भी करें लेकिन घूम-फिर कर वो बात मुख्यमंत्री पद की ही करने लगते हैं. चाहे लालू प्रसाद के साथ जाने की बात हो या फिर नीतीश के साथ दोबारा जुड़ने का मामला, हर बार मांझी खुद को मुख्यमंत्री के तौर पर ही देखते नजर आते हैं.
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