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आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, 400 बेनामी सौदे पकड़े, 600 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी कीं कुर्क

आयकर विभाग ने पिछले सप्ताह देशभर में 24 बेनामी प्रतिबंध यूनिट 'बीपीयू' बनाई गई हैं. विभाग ने पिछले साल एक नवंबर से नए बेनामी सौदे 'प्रतिबंध' संशोधन कानून, 2016 के तहत कार्रवाई करनी शुरू की थी.

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देशभर में 24 बेनामी प्रतिबंध यूनिट तैनात की हैं
देशभर में 24 बेनामी प्रतिबंध यूनिट तैनात की हैं

आयकर विभाग ने 240 मामलों में 400 से अधिक बेनामी सौदों का पता लगाया है और 600 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं. आयकर विभाग नया बेनामी कानून को अमल में लाना चाहता है, जिससे मनचाहे नतीजे जमीन पर दिखाई दें.

देशभर में 24 बेनामी प्रतिबंध यूनिट तैनात
आयकर विभाग ने पिछले सप्ताह देशभर में 24 बेनामी प्रतिबंध यूनिट 'बीपीयू' बनाई हैं. विभाग ने पिछले साल एक नवंबर से नए बेनामी सौदे 'प्रतिबंध' संशोधन कानून, 2016 के तहत कार्रवाई करनी शुरू की थी.

क्या है सजा के प्रवाधान
इस कानून में अधिकतम सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान भी है. चल और अचल, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, मूर्त और अमूर्त संपत्ति, यदि उसके वास्तविक लाभ प्राप्त कर्ता स्वामी के बजाय किसी अन्य के नाम पर हों, तो उसे बेनामी संपत्ति कहा जाता है.

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600 करोड़ की संपत्ति कुर्क
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि आयकर जांच निदेशालय ने 23 मई, 2017 तक 400 से अधिक बेनामी लेनदेन की पहचान की थी. इनमें बैंक खातों में जमा, जमीन का टुकड़ा, फ्लैट और ज्वेलरी शामिल है. बयान में कहा गया है कि कानून के तहत 240 से अधिक मामलों में अस्थायी रूप से संपत्तियों को कुर्क किया गया है. कुर्क की गई संपत्तियों का मार्किट वैल्यू 600 करोड़ रुपये के करीब हैं.

सरकारी अधिकारियों भी जांच दायरे में
आयकर विभाग ने कहा कि कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में 40 से अधिक मामलों में अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है. मूल्य के हिसाब से ये संपत्तियां 530 करोड़ रुपये से अधिक बैठती हैं. इसके अलावा विभाग ने भ्रष्ट व्यवहार के जरिये कमाए धन का पता लगाने के लिए पिछले एक महीने में 10 वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के परिसरों पर छापेमारी भी की है.

ड्राइवर के पास मिली 7.7 करोड़ रु. की संपत्ति
इसका ब्योरा देते हुए विभाग ने बताया कि जबलपुर में एक मामले में एक ड्राइवर के नाम 7.7 करोड़ रुपये की जमीन थी. इस जमीन की वास्तविक मालिक मध्य प्रदेश की सूचीबद्ध कंपनी और उसका मालिक है. इसी तरह मुंबई में एक पेशेवर के पास कई अचल संपत्तियां थीं, जो मुखौटा कंपनियों के नाम पर खरीदी गई थीं.ये कंपनियां सिर्फ कागज पर थीं.

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