पिछले सौ साल में यह पहली बार है कि जब भारतीय रेलवे ने अपना संचालन बंद कर दिया है. इसलिए रेलवे के पास कोच यार्डों में जितने कोच मौजूद हैं, उतने पहले कभी नहीं थे.
पूर्वी रेलवे के हावड़ा रेलवे डिवीजन में टिकियापारा कोचिंग यार्ड की लगभग 40 पटरियों पर 600 से अधिक कोच खड़े हैं. यह वैसा ही है जैसा कि हम कभी-कभी सिनेमा के किसी दृश्य में देखते हैं. इस डिवीजन में 400 किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र है और बर्दवान, बिहार व झारखंड के कुछ हिस्सों में ऐसे कई महत्वपूर्ण जंक्शन हैं. इस क्षेत्र से चलने वाली ट्रेनों का रख-रखाव हावड़ा कोचिंग यार्ड में किया जाता है.
यह शायद पहली बार है जब इस यार्ड में लगभग 1200 कर्मचारियों में से केवल लगभग 50 कर्मचारी काम करने के लिए रिपोर्ट कर रहे हैं. उन्हें भी इसलिए लगाया गया है क्योंकि रेलवे द्वारा आइसोलेशन कोच बनाने के लिए उन्हें जिम्मेदारियां दी गई हैं.
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भारतीय रेल हमेशा 24 घंटे और 365 दिन काम करने के लिए जानी जाती है, लेकिन अब इसमें ठहराव आ गया है. इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि हावड़ा कोचिंग यार्ड में सभी 450 कोच एक ही समय में और एक ही स्थान पर एकत्र हुए हों.
100 से अधिक ट्रैक हैं, जहां 450 से अधिक कोचों और इंजनों के साथ विभिन्न ट्रेनों को यहां एक साथ पार्क किया गया है. आप यहां पर राजधानी, शताब्दी, दूरंतो, पूर्वा, युवा एक्सप्रेस और अन्य कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को पार्किंग में लगी देख सकते हैं. इस यार्ड के पूरे फैलाव में लगभग 40 ट्रैक हैं. ऐसा कभी नहीं हुआ कि सभी ट्रेनें यहां यार्ड के पूरे फैलाव में एक साथ खड़ी हुई हों.
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टिकियापारा कोचिंग यार्ड के अधिकारी (SSE) एके रॉय ने कहा, "अपनी 33 वर्षों की सेवा में मैंने कभी भी इस प्रकार की स्थिति नहीं देखी है कि हमारे पास लगभग 1200 कर्मचारी हैं, जिनमें से 52-55 लोग केवल आइसोलेशन कोच बनाने के लिए यहां आ रहे हैं और अधिकांश कर्मचारी घर में हैं. वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम यहां हर दिन नहीं आ सकते."