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‘मुंबई हमलों के बारे में पहले से बता चुकी थीं हेडली की पत्नियों’

भारत विरोधी भावना रखने वाले डेविड हेडली की तीन में से दो पत्नियों द्वारा एफबीआई को मुंबई हमलों से काफी पहले ही आगाह कर देने के बारे में यहां के मीडिया ने खुलासा किया है लेकिन अमेरिका ने कहा कि उसने खतरे से संबंधित जानकारी भारत के साथ साझा की थी जो सामान्य प्रकृति की थी.

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भारत विरोधी भावना रखने वाले डेविड हेडली की तीन में से दो पत्नियों द्वारा एफबीआई को मुंबई हमलों से काफी पहले ही आगाह कर देने के बारे में यहां के मीडिया ने खुलासा किया है लेकिन अमेरिका ने कहा कि उसने खतरे से संबंधित जानकारी भारत के साथ साझा की थी जो सामान्य प्रकृति की थी.

पचास वर्षीय हेडली की अमेरिकी पत्नी ने उसके पति के लश्कर ए तैयबा से संबंध होने के बारे में 2005 में ही न्यूयॉर्क में एफबीआई को बता दिया था, जबकि उसकी मोरक्को मूल की पत्नी ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को वर्ष 2008 के मुंबई हमलों से एक वर्ष से भी कम समय पहले यह बता दिया था कि पाकिस्तान मूल का यह अमेरिकी आतंकवादी किसी हमले का षड्यंत्र रच रहा है.

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर कहती है, ‘तीन में से दो पत्नियों के आगाह किये जाने के बावजूद हेडली लश्कर के लिये 2002 से 2009 के बीच आसानी से घूमता रहा. उसने छोटे कैलिबर हथियार चलाने, जवाबी निगरानी करने, हमलों के लिये टोह लेने और शिकागो से लेकर पाकिस्तान की अराजक पश्चिमोत्तर सीमा तक संपर्क तंत्र स्थापित करने का प्रशिक्षण हासिल किया.’

व्हाइट हाउस स्थित अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता माइक हैमर ने बताया, ‘अगर हमें मुंबई हमलों का समय और अन्य विशिष्ट जानकारी मालूम होती तो हम ऐसे विवरण को तुरंत भारत सरकार के साथ साझा करते.’ उनसे जनहित में खोजी पत्रकारिता करने वाले अलाभकारी स्वतंत्र संगठन ‘प्रोपब्लिका’ की बीते शुक्रवार मुंबई हमलों के बारे में दी गयी खबर के बारे में पूछा गया था.

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भी खबर दी कि 50 वर्षीय हेडली की तीन में से दो पत्नियों ने वर्ष 2005 में और फिर 2008 में हुए मुंबई हमलों से एक वर्ष से भी कम समय पहले अमेरिकी एजेंसियों को हेडली के लश्कर ए तैयबा से संबंध होने तथा मुंबई पर हमले की साजिश रचे जाने के बारे में आगाह किया था.{mospagebreak}

हैमर ने कहा कि अमेरिका ने वर्ष 2008 में मुंबई हमले होने से पहले भारतीय अधिकारियों को खतरों से संबंधित जानकारी नियमित तौर पर मुहैया करायी थी. उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार की जिम्मेदारी है कि दूसरे देशों को उनकी सरजमीं पर होने वाली संभावित आतंकवादी गतिविधियों के बारे में सूचित किया जाये.

अमेरिका के एक अन्य अधिकारी ने इस बात का खंडन किया कि अमेरिका ने भारतीय प्रशासन के साथ किसी आतंकवादी हमले के बारे में जानकारी साझा नहीं की थी. अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हेडली की पूर्व पत्नियों ने जो बताया, उसे अमेरिकी प्रशासन ने गंभीरता से लिया. उनकी दी गयी जानकारी की प्रकृति सामान्य थी और उससे किसी विशिष्ट आतंकवादी षड्यंत्र के संकेत नहीं मिलते थे.’

बहरहाल, मुंबई हमलों की जांच से जुड़े एक भारतीय सूत्र ने अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर ‘प्रेस ट्रस्ट’ को बताया कि भारत को जानकारी तो मिली थी लेकिन उसकी प्रकृति सामान्य थी और उसमें कोई विशिष्ट बात नहीं कही गयी थी. खबर कहती है, ‘हेडली की मोरक्को मूल की 27 वर्षीय पत्नी फैजा ओउटाल्हा ने दावा किया कि उसने (इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी) दूतावास के अधिकारियों को ताज महल होटल में ली गयी हेडली की और उसकी तस्वीर भी दिखायी जहां वे दोनों अप्रैल और मई 2007 में ठहरे थे. होटल के रिकॉर्ड से उनके वहां ठहरने की पुष्टि होती है.’{mospagebreak}

फैजा ने कहा कि इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास में अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई उसकी दो मुलाकातों के दौरान उसने बताया था कि उसके पति के कई ऐसे मित्र हैं जो लश्कर ए तैयबा के प्रमुख सदस्य हैं. खबर के अनुसार, ‘उसने (फैजा ने) कहा कि उसने बताया था कि वह (हेडली) धुर भारत विरोधी है, लेकिन उसने कई बार व्यापारिक समझौतों के लिये भारत यात्रा की मगर वह उसे कभी ज्यादा तवज्जो देता प्रतीत नहीं हुआ.

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर कहती है कि वादामाफ गवाह बनाने के लिये हुए सौदे के तहत अपने उपर लगे आतंकवाद से संबंधित सभी 12 आरोपों को स्वीकार कर चुके हेडली को पाकिस्तानी और अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी उसकी गिरफ्तारी से काफी पहले बतौर आतंकवादी जानते थे.

खबर के मुताबिक, मुंबई हमलों से वषरें पहले हुई पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी हेडली की गतिविधियों की पड़ताल और वाशिंगटन, पाकिस्तान, भारत तथा मोरक्को में हुए इंटरव्यू के आधार पर मिली जानकारी बताती है कि हेडली के जाहिरा तौर पर एकदूसरे से अलग-अलग समूहों यानी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों, आतंकवादियों और अमेरिका के नशा निरोधी जांचकर्ताओं के साथ परस्पर लेकिन उलझा देने वाले संपर्क थे.
फैजा ने अमेरिकी अधिकारियों को यह भी बताया कि हेडली की अलग-अलग पहचान थी. जब वह पाकिस्तान में होता था तो उसका नाम दाउद था और वह एक धार्मिक मुस्लिम नजर आता था और जब वह भारत में होता था तो उसका नाम बतौर अमेरिकी प्लेबॉय डेविड होता था.{mospagebreak}

फैजा ने अखबार को बताया, ‘मैंने उनसे (अमेरिकी अधिकारियों से) कहा कि वह या तो आतंकवादी है या वह आपके लिये काम करता है. परोक्ष रूप से उन्होंने मुझसे कहा कि मैं वहां से दफा हो जाउं.’

अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि फैजा की अमेरिकी अफसरों से मुलाकात इस बारे में हुई थी कि उसका पति ‘खराब लोगों’ की संगत में है और वे लोग ‘जिहाद’ छेड़ने की साजिश रच रहे हैं. अधिकारी ने कहा, ‘लेकिन उसने यह जानकारी नहीं दी कि इसमें कौन शामिल है या उनके निशाने पर क्या है.’

उधर, फैजा ने कहा, ‘उनका (अमेरिकी अधिकारियों का) ध्यान आकषिर्त करने के लिये मैंने सब कुछ किया. यह ऐसा था जैसे मैं चिल्ला-चिल्ला कर कह रही हूं कि यह व्यक्ति आतंकवादी है और आपको कुछ न कुछ करना होगा.’

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर संकेत देती है कि अमेरिकी अधिकारियों के चेतावनियों को नजरअंदाज कर देने का कारण यह हो सकता है कि वे जांच को उस दिशा में ले जाने से बचना चाहते हों जो हमलों में अमेरिका के अहम सहयोगी पाकिस्तान की संलिप्तता के सबूत देती हो. आईएसआई हमलों में अपनी संलिप्तता का खंडन कर चुकी है.{mospagebreak}

अखबार के मुताबिक, ‘अमेरिका ने कहा है कि (आईएसआई के खंडन के) जवाब में उसके पास कोई सबूत नहीं है. बहरहाल, अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि आईएसआई के कुछ मौजूदा या सेवानिवृत्त अफसरों की हमलों में कुछ भूमिका हो सकती है.’

खबर कहती है कि चेतावनियों पर कार्रवाई नहीं होना आतंकवाद के खिलाफ जंग में सूचनाओं के आदान प्रदान से संबंधित खामी हो सकती है और इससे ये सवाल भी खड़े होते हैं कि क्या अमेरिकी अधिकारियों ने हेडली के नशा निरोधी प्रवर्तन प्रशासन (डीईए) का मुखबिर होने के चलते इस संबंध में अधिक तफ्तीश नहीं की.

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