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गुजरात कैडर के IPS अधिकारी राकेश अस्थाना को CBI चीफ का प्रभार

सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा शुक्रवार को अपने पद से रिटायर्ड हो गए. अनिल सिन्हा ने गुजरात काडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को अपना प्रभार सौंप दिया.

राकेश अस्थाना राकेश अस्थाना

सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा शुक्रवार को अपने पद से रिटायर्ड हो गए. अनिल सिन्हा ने गुजरात कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को अपना प्रभार सौंप दिया. सरकार ने अभी जांच ब्यूरो के लिए पूर्ण कालिक प्रमुख की घोषणा नहीं की है. गुजरात कैडर के 1984 बैच के अधिकारी अस्थाना को दो दिन पहले सीबीआई में अतिरिक्त निदेशक के रूप में प्रोन्नत किया गया था.

इससे पहले विशेष निदेशक आर के दत्ता, जो जांच ब्यूरो के प्रमुख के पद की दौड़ में थे, उनको विशेष सचिव के तौर पर गृह मंत्रालय भेज दिया गया था. मंत्रालय में पहली बार दूसरे विशेष सचिव का पद सृजित किया गया है. दस साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि निवर्तमान सीबीआई प्रमुख के उत्तराधिकारी का चयन नहीं किया गया है. सिन्हा ने शुक्रवार को दो साल का अपना कार्यकाल पूरा किया.

दरअसल बिहार से 1979 बैच के आईपीएस अनिल कुमार सिन्हा के अपना कार्यकाल पूरा करने के तत्काल बाद प्रभाव से और अगले आदेश तक के लिए सीबीआई के निदेशक पद का अतिरिक्त कार्यभार आईपीएस (गुजरात 1984) राकेश अस्थाना को बतौर सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक सौंपने को मंजूरी प्रदान की है. सीबीआई प्रमुख का चयन एक कॉलेजियम करता है जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता या विपक्ष के सबसे बड़े दल के नेता और प्रधान न्यायाधीश होते हैं. अभी कॉलेजियम की बैठक नहीं हो पाई है.

60 साल के सिन्हा ने तब सीबीआई की कमान संभाली थी जब जांच ब्यूरो पिंजरे में बंद तोता और बंद जांच एजेंसी जैसे तीखे कटाक्षों का सामना कर रहा था. सिन्हा ने सीमित सोशल सर्किल के साथ मीडिया से दूर रहकर एजेंसी के कामकाज को संभाला और उसे आगे बढ़ाया. सिन्हा एजेंसी के मृदु भाषी लेकिन दृढ़ नेता साबित हुए जिन्होंने शीना बोरा हत्याकांड और विजय माल्या ऋण गड़बड़ी कांड जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच का मार्गदर्शन किया.

विजल माल्या मामले में सिन्हा ने यह तय किया कि इस तड़क-भड़क वाले शराब कारोबारी के खिलाफ बंद पड़ चुकी उसकी किंगफिशर एयरलाइंस को मिले रिण की कथित रूप से अदायगी नहीं किए जाने को लेकर मामला दर्ज हो जबकि बैंक शिकायत लेकर सीबीआई नहीं पहुंची थी. सिन्हा ने शीना बोरा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद अपनी टीमों को इस मामले में पीटर मुखर्जी की भूमिका खंगालने का निर्देश दिया, उन्होंने यह पक्का किया कि सीबीआई सार्वजनिक बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियों के ढेरों मामलों की सघनता से तहकीकात हो, जबकि बैंक संभावित मध्य मार्ग बंद हो जाने के डर से इन मामलों की जांच शुरू किये जाने के पक्ष में नहीं थे. बैंकों को लगता था कि ऋण उल्लंघनकर्ताओं से बातचीत से बीच का रास्ता निकल सकता है.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की स्थापना के पहले दशक में ही उसके छात्र रहे सिन्हा की मनोविग्यान एवं अर्थशास्त्र में रूचि रही है और उन्हें अपने परिवार के साथ वक्त गुजारना अच्छा लगता है.

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