गोरखा जनमुक्ति मोर्चा मई महीने में त्रिपक्षीय वार्ता के छठे दौर से पहले दार्जिलिंग में अंतरिम व्यवस्था के लिए केंद्र सरकार से वार्ता करेगा. केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम के साथ वार्ता करने वाले जीजेएम के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिमल गुरुंग करेंगे.
पहली बार पार्टी का नेतृत्व करने वाले गुरुंग के साथ पार्टी के महासचिव रोशन गिरी एवं अन्य नेताओं हरका बहादुर छेत्री, अमर लामा और अमर राय भी होंगे. दिल्ली के लिए गुरुवार को प्रस्थान करने वाले जीजेएम प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि आंतरिक व्यवस्था में शामिल किए जाने वाले इलाकों से वह बिल्कुल समझौता नहीं करेंगे जो 31 दिसंबर 2011 तक प्रस्तावित था.
बहरहाल जीजेएम अपने पुराने रुख से पीछे हटा जिसमें पूरे दोआर एवं तराई इलाके को शामिल करना था और अब वह सिर्फ गोरखा बहुल इलाकों को शामिल करने की मांग पर अड़ा है. अंतरिम व्यवस्था पर चर्चा के लिए हाल में जीजेएम का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली आया था.
गुरुंग ने दावा किया था कि अंतरिम व्यवस्था उतनी ही अच्छी होगी जितना अलग गोरखालैंड राज्य. उन्होंने कहा था, ‘केवल नाम अलग होगा.’ हरका बहादुर छेत्री ने कहा था कि किसी कीमत पर वह सिलीगुड़ी को शामिल करने की मांग नहीं छोड़ेंगे. दिल्ली में पिछले महीने अधिकारी स्तर की वार्ता में पश्चिम बंगाल के गृह सचिव अद्र्धेंदु सेन ने स्पष्ट किया था कि तीन पर्वतीय सबडिवीजनों को छोड़कर सिलीगुड़ी या किसी अन्य इलाके को शमिल करना ‘अव्यावहारिक और असंभव है.’