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जर्मन बेकरी में बम रखने से पहले यासीन भटकल ने ऑर्डर की थी कोल्ड कॉफी

फरवरी 2010 में पुणे की जर्मन बेकरी में बम रखने से पहले इंडियन मुजाहिदीन के गिरफ्तार आतंकी यासीन भटकल ने 'एप्पल पाई' और 'कोल्ड कॉफी' का ऑर्डर दिया था. इतना ही नहीं, बेकरी आते समय उसने ऑटो में अपने एक सहयात्री को मजाक में बैग में बम होने की बात बता दी थी.

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यासीन भटकल
यासीन भटकल

फरवरी 2010 में पुणे की जर्मन बेकरी में बम रखने से पहले इंडियन मुजाहिदीन के गिरफ्तार आतंकी यासीन भटकल ने 'एप्पल पाई' और 'कोल्ड कॉफी' का ऑर्डर दिया था. इतना ही नहीं, बेकरी आते समय उसने ऑटो में अपने एक सहयात्री को मजाक में बैग में बम होने की बात बता दी थी.

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' में छपी खबर के मुताबिक, ऐसी कई हैरान कर देने वाली बातें यासीन से पूछताछ में सामने आई हैं. पिछले महीने भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार भटकल ने बताया है कि उसने किस तरह बेहद आसानी से बम रखने जैसे खतरनाक काम को अंजाम दिया. जर्मन बेकरी बम धमाके में 17 लोगों की मौत हो गई थी.

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छात्र बनकर पहुंचा पुणे
यासीन ने बताया कि पुणे के आईएम आतंकियों की गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए जर्मन बेकरी धमाके की योजना बनाई गई थी. यासीन जनवरी 2010 में छात्र बनकर पुणे पहुंचा था. एक हफ्ते तक शहर का सर्वे करने के बाद उसने धमाके के लिए दो जगह चुनीं, मशहूर दगड़ू हलवाई सेठ मंदिर और जर्मन बेकरी. दोनों ही जगहों पर धमाके पूरी दुनिया का ध्यान खींच सकते थे. यासीन का प्लान ओशो आश्रम के पास भी धमाका करने का था, क्योंकि वहां भी काफी संख्या में विदेशी आते रहते हैं.

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मैंने कहा बैग में बम है और वे हंसने लगे
यासीन ने अपने साथी आतंकी कतील सिद्दीकी को मंदिर और बेकरी की लोकेशन दिखाई और धमाके की 'रिहर्सल' करने मंदिर भेजा. कतील ने माथे पर टीका लगाकर मंदिर की परिक्रमा भी की. धमाके के तय दिन वह कतील को बम रखने का निर्देश देकर खुद जर्मन बेकरी रवाना हो गया. पूछताछ में यासीन ने बताया है, 'मैंने शेयर्ड ऑटो लिया. ऑटो में बैठे एक आदमी ने बैग के बारे में पूछा. मैंने उससे कहा कि बम है और फिर सब हंसने लगे.'

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पुलिस वाले भी पहुंचे थे बेकरी
जर्मन बेकरी से 200 मीटर पहले यासीन उतर गया और बेकरी की ओर पैदल ही चल पड़ा. उसने बताया है, 'मैंने एक एप्पल पाई और कोल्ड कॉफी ऑर्डर की. इस दौरान वहां पुलिस वाले भी आए और बेकरी जल्दी बंद करने को कहा क्योंकि उस दिन शिवसेना के लोग शाहरुख की फिल्म 'माय नेम इज खान' के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.'

मंदिर में पकड़ा गया कतील, पर बहाना बनाकर भागा
यासीन ने बताया, 'मैंने बेकरी की बेंच के नीचे बैग रख दिया और बस स्टैंड चला आया.' इसके बाद यासीन कतील से संपर्क नहीं कर सका. बस लेकर वह नासिक चला गया और वहां से ट्रेन लेकर दिल्ली आ गया. इसी ट्रेन के जनरल डिब्बे में उसे कतील मिल गया.

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यासीन ने बताया, 'जब मैं कतील से मिला, उसने बताया कि जब उसने मंदिर में बम वाला बैग रखने की कोशिश की तो एक सिक्योरिटी गार्ड ने उसे देख लिया. गार्ड ने पूछा कि बैग में ताला क्यों लगा है. इस पर कतील ने कहा कि इसकी चाभी उसकी गर्लफ्रेंड के पास है और वह उसका इंतजार कर रहा है.'

धमाके के बाद दिल्ली में रहा यासीन
गार्ड ने कतील को 15 मिनट तक बैठाए रखा, लेकिन वह भाग निकलने में सफल रहा. उसने टाइमर की बैटरी निकाल दी और मुंबई चला आया. यहां उसने बैग समंदर में बहा दिया. यासीन ने बताया, 'मैं दिल्ली में ही रहा और कतील झांसी रेलवे स्टेशन से दरभंगा लौट गया.'

पुणे की यरवदा जेल में पिछले साल कतील की हत्या कर दी गई.

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