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जस्टिस गांगुली के खिलाफ केस दर्ज करा सकती है लॉ इंटर्न

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ए के गांगुली ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और उनके इस इंकार की कड़ी आलोचना करते हुए पीड़िता पूर्व लॉ इंटर्न ने संकेत दिए हैं कि वह उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अशोक कुमार गांगुली सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अशोक कुमार गांगुली

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ए के गांगुली ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और उनके इस इंकार की कड़ी आलोचना करते हुए पीड़िता पूर्व लॉ इंटर्न ने संकेत दिए हैं कि वह उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है. जस्टिस गांगुली ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पी सदाशिवम को एक चिट्ठी लिखकर अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया और साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ शक्तिशाली तबकों के खिलाफ दिए गए उनके फैसलों के कारण उनकी छवि खराब करने के लिए यह सब किया जा रहा है.

पूर्व लॉ इंटर्न ने अपने ब्लॉग लीगली इंडिया पर जस्टिस गांगुली की आलोचना करते हुए लिखा है, ‘जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं और मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं, वे पूर्वाग्रह के कारण ऐसा कर रहे हैं ताकि मुद्दे को उलझाया जा सके और वो जांच और जवाबदेही से बच निकलें.’

पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का संकेत देते हुए इंटर्न ने लिखा है, ‘मैं अपील करती हूं कि इस बात का संज्ञान लिया जाए कि यह मेरे विवेकाधीन है कि मैं उचित समय पर उचित कार्यवाही को आगे बढ़ा सकती हूं. मैं कहना चाहती हूं कि मेरी स्वायत्तता का पूरी तरह सम्मान किया जाए.’ इंटर्न ने कहा कि जो भी यह दावा कर रहा है कि मेरे बयान गलत हैं, वह न केवल मेरी बेइज्जती कर रहा है बल्कि सुप्रीम कोर्ट का भी असम्मान कर रहा है.

उसने लिखा है, ‘मैं कहना चाहूंगी कि मैंने पूरे मामले में, इस स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, बेहद जिम्मेदारी के साथ काम किया है.’

'पहली नजर में गांगुली लगते हैं दोषी'
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति ने जस्टिस गांगुली के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की है और कहा है कि पीड़िता का लिखित और मौखिक बयान प्रथम दृष्टया खुलासा करता है कि पिछले साल 24 दिसंबर को ली मैरिडियन होटल के कमरे में जज ने उसका यौन उत्पीड़न किया था. गांगुली के पत्र को खारिज करते हुए इंटर्न ने कहा है कि घटना के बाद जब वह कोलकाता में अपने कॉलेज लौटी तो उसने अलग अलग समय पर अपने कुछ फैकल्टी से बातचीत की.

लॉ इंटर्न ने लिखा है, ‘चूंकि घटना इंटर्नशिप के समय हुई थी और विश्वविद्यालय की इंटर्नशिप के दौरान महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ कोई नीति नहीं है तो मुझे संकेत दिया गया कि कोई भी कार्रवाई निष्प्रभावी होगी.’ उसने लिखा, ‘मुझे यह भी सूचित किया गया कि मेरे पास केवल एक ही रास्ता है कि पुलिस में शिकायत दर्ज करायी जाए जो मैं करना नहीं चाहती थी. बहरहाल, मैं महसूस कर रही थी कि युवा विधि छात्रों को सतर्क करना महत्वपूर्ण है कि दर्जा और स्थिति को नैतिकता और गरिमा के मापदंडों के साथ भ्रमित नहीं किया जाए. इसलिए मैंने ब्लॉग पोस्ट के जरिए ऐसा करने का रास्ता चुना.’ इंटर्न ने कहा है कि जज गांगुली के खिलाफ आरोपों की जांच करने वाली तीन जजों की समिति के समक्ष गवाही के दौरान उसने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाही की गोपनीयता और इस मामले में शामिल हर किसी की निजता सुनिश्चित किए जाने की अपील की थी.’

उसने लिखा है, ‘मैंने तीन सदस्यीय जजों की समिति की नीयत और क्षेत्राधिकार पर किसी भी समय सवाल नहीं उठाया और पूरा विश्वास था कि वे मेरे बयानों की सच्चाई को मानेंगे.’

बयान सार्वजनिक करने की दी थी इजाजत
इंटर्न ने कहा कि 18 नवंबर को समिति के सामने पेश होने और बयान देने के बाद उसने समिति को अपने हस्ताक्षर के साथ एक लिखित बयान भी सौंपा था. 29 नवंबर को उसने अतिरक्त महाधिवक्ता इंदिरा जयसिंह को एक हलफनामा भेजा था जिसमें यौन शोषण की घटना से जुड़ी जानकारियां दीं और उनसे उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया. इंटर्न ने कहा कि हलफनामे में वहीं चीजें थीं जो उसने समिति के सामने दिए गए अपने बयान में कहीं.

उसने कहा, ‘समिति की रिपोर्ट के क्रियाशील हिस्से को सार्वजनिक किए जाने के बाद भी कई प्रतिष्ठित नागरिक और कानूनविदों ने समिति के निष्कर्षों का उपहास करना और मुझे बदनाम करना जारी रखा.’ इंटर्न ने कहा, ‘इस वजह से मैंने अपनी और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा की रक्षा के लिए अपने बयान के ब्यौरों को स्पष्ट करना जरूरी समझा. इसलिए मैं इंदिरा जयसिंह को अपने बयान सार्वजनिक करने का अधिकार देती हूं.’ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी अपनी चिट्ठी में जस्टिस गांगुली ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उचित सुनवाई की व्यवस्था ना करने की भी शिकायत की थी.

गांगुली ने कहा था, ‘मुझे लगता है कि यह कुछ निश्चित हितों के इशारे पर मेरी छवि धूमिल करने की स्पष्ट कोशिश है.’

जस्टिस गांगुली 2जी आवंटन घोटाले से जुड़े कई मामलों में आदेश देने वाली पीठ का हिस्सा थे. इन आदेशों में केंद्र द्वारा टेलीकॉम कंपनियों को दिए गए 122 लाइसेंस रद्द करने का आदेश शामिल है. इंटर्न के यौन शोषण के आरोपी जस्टिस गांगुली ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इंकार किया है.

क्या है जस्टिस गांगुली पर आरोप
समिति को सौंपे गए अपने हलफनामे में इंटर्न ने कहा था कि गांगुली ने उसे क्रिसमस की पूर्व संध्या पर एक रिपोर्ट पूरी करने के लिए अपने होटल के कमरे में बुलाया था. उसने कहा, ‘जस्टिस ने मुझसे कहा कि रिपोर्ट अगले दिन जमा करनी है और मैं होटल में हीं रूककर पूरी रात काम करूं. मैंने इससे इंकार करते हुए कहा कि मुझे काम जल्द ही पूरा करना है और अपने पीजी हॉस्टल लौटना है.’

इंटर्न ने कहा, ‘कुछ देर बाद न्यायाधीश ने रेड वाइन की बोतल निकाली और वाइन पीते हुए कहा कि चूंकि तुम दिनभर काम करके थक गयी होगी, तुम मेरे बेड रूम में चली जाओ और आराम कर लो.’ इंटर्न ने कहा, ‘इसके बाद जस्टिस ने कहा, ‘तुम बहुत सुंदर हो.’ मैं तुरंत अपनी जगह से उठी और जब तक कुछ कहती उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर कहा कि तुम्हें पता है कि नहीं कि मैं तुम्हारे प्रति आकर्षित हूं? लेकिन मैं तुम्हें पसंद करता हूं, मैं तुमसे प्यार करता हूं. जब मैंने वहां से हटने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा हाथ चूमते हुआ फिर कहा कि वह मुझसे प्यार करते हैं.’

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