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चुनावी फायदे के लिए जेटली ने घटाए तेल के दाम? कांग्रेस ने उठाए सवाल

इसी साल के अंत में चार राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा और अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में कई लोग सरकार के तेल के दाम घटाने के पीछे चुनावों को एक बड़ी वजह के तौर पर देख रहे हैं.

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वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो, PIB)
वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो, PIB)

नरेंद्र मोदी सरकार ने गुरुवार को जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम 2.50 रुपये घटा दिए. इसका मतलब यह हुआ कि आप देश के जिस भी शहर में रहते हों, वहां आपको हर लीटर पर अब ढाई रुपये कम खर्च करने होंगे. लेकिन क्या इससे तेल के दाम को लेकर हो रही आलोचना से सरकार बच जाएगी? उससे भी अहम सवाल यह है कि क्या इससे बीजेपी को राजनीतिक फायदा होगा?

यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि क्योंकि इसी साल के अंत में चार राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा और अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में कई लोग सरकार के तेल के दाम घटाने के पीछे चुनावों को एक बड़ी वजह के तौर पर देख रहे हैं.

तेल का चुनावी खेल!

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10 सितंबर को तेल के बढ़ते दामों को लेकर बुलाए गए भारत बंद से ठीक एक दिन पहले राजस्थान सरकार ने 9 सितंबर को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट में 4 फीसदी की कटौती की थी. लेकिन बावजूद इसके तेल के दाम बढ़ने जारी रहे और आम आदमी की जेब ढीली होती रही. तेल के दाम घटने और चुनाव को इसलिए भी जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि इसी साल कर्नाटक चुनाव से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमत में पूरे 20 दिन तक कोई बदलाव नहीं हुआ था. वहीं, 12 मई को वोटिंग होने के बाद लगभग 17 दिनों के भीतर ही पेट्रोल के दाम करीब 4 रुपये बढ़ गए थे. इससे पहले 16 जनवरी से 1 अप्रैल के बीच भी पेट्रोल और डीजल के दामों में बदलाव नहीं हुआ था. उस वक्त पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मणिपुर में उपचुनाव होने थे.

कांग्रेस ने साधा निशाना

जेटली की ओर से गुरुवार को ढाई रुपये की कटौती के ऐलान के बाद कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा,  'बीजेपी सरकार को अब लगने लगा है कि चुनावी माहौल में उसे फायदा नहीं मिलने वाला है. पूरी दुनिया में तेल के दाम कम हो रहे थे, तब आपने जनता को फायदा लेने नहीं दिया. तेल कंपनियों को फायदा दिया. राजनैतिक माहौल में फायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन यह बहुत देर में उठाया गया, बहुत छोटा कदम है.'

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चार गुने से ज्यादा बढ़ी एक्साइज ड्यूटी

इसी साल 10 सितंबर को डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों के खिलाफ कांग्रेस ने भारत बंद बुलाया था. तब कांग्रेस ने कहा था कि 2014 के मुकाबले पेट्रोल की एक्साइज ड्यूटी में 211.7 फीसदी और डीजल की एक्साइज ड्यूटी में 433 पर्सेंट की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. दावे के मुताबिक 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.2 रुपये प्रति लीटर थी जो गुरुवार की कटौती के ऐलान से पहले तक 19.48 रुपए/लीटर थी. वहीं डीजल पर साल 2014 में 3.46 रुपए एक्साइड ड्यूटी लगती थी जो बढ़कर 15.33 रुपए/लीटर हो गई थी.

सरकार ने आयुष्मान जैसी योजनाओं में लगाया पैसा?

विपक्षी पार्टी कांग्रेस का यह आरोप भी है कि सरकार ने पहले चार साल में कोई काम नहीं किया और जब आखिरी साल बचा तो तेल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया. इसी पैसे से आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में धन लगाया जा रहा है ताकि चुनाव में उसका फायदा हासिल किया जा सके. यानी जनता की जेब से ही पैसे निकालकर जनता पर खर्च करने की कवायद.

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