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मंत्रालय जासूसी कांड: कोर्ट ने पांचों आरोपियों को तीन दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा

मंत्रालय जासूसी कांड में शामिल पांचों आरोपियों को कोर्ट ने शनिवार को तीन दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है. जासूसी कांड में फंसे कॉरपोरेट जगत के इन पांच आरोपियों को 24 फरवरी तक के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया है. कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 24 फरवरी करेगा.

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Dharmendra Pradhan Dharmendra Pradhan

मंत्रालय जासूसी कांड में शामिल पांचों आरोपियों को कोर्ट ने शनिवार को तीन दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है. जासूसी कांड में फंसे कॉरपोरेट जगत के इन पांच आरोपियों को 24 फरवरी तक के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया है. कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 24 फरवरी करेगा.

आपको बता दें कि पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी का खुलासा इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) से मिली जानकारी के आधार पर हुआ. सूत्रों के मुताबिक आईबी ने सितंबर में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को इसकी जानकारी दी थी. आईबी के मुताबिक मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के दो अधिकारी शक के दायरे में हैं. आईबी इस केस में 6 महीने से काम कर रहा था.

अब भी पीएमओ सीधे आईबी के संपर्क में है और गृह मंत्रालय को भी पल-पल की जानकारी दी जा रही है. खुफिया विभाग अब पेट्रोलियम व अन्य मंत्रालयों के बड़े अधिकारियों के विदेश दौरों से जुड़ी जानकारी भी जुटा रहा है.

उधर, जासूसी कांड की तफ्तीश एक कदम आगे बढ़ गई है. पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला है कि शांतनु सैकिया और प्रयास जैन पांच बड़ी कंपनियों के अधिकारियों को खुफिया दस्तावेज बेचते थे. इन दोनों से दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में पूछताछ की जा रही है. शुक्रवार को बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के 5 अधिकारी गिरफ्तार कर लिए गए.

मामले पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भरोसा दिया है कि कोई भी दोषी व्यक्ति नहीं बख्शा जाएगा और उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी.

वहीं पुलिस को आरोपियों के पास से बेहद संवेदनशील दस्तावेज मिले हैं. वहीं जांच में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि जासूसों के तार सिर्फ पेट्रोलियम मंत्रालय ही नहीं बल्कि कोयला और ऊर्जा समेत कई मंत्रालयों में फैले थे.

दिल्ली पुलिस ने जासूसी कांड में जो एफआईआर दर्ज की है, उसके मुताबिक आरोपियों से कई संवेदनशील दस्तावेज बरामद हुए हैं. जिनमें ये अतिसंवेदनशील दस्तावेज शामिल हैं.

- वित्त मंत्री के बजट भाषण का हिस्सा
- प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा की एक गोपनीय चिट्ठी
- पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल की दिसंबर महीने की गोपनीय रिपोर्ट
- 4 फरवरी की श्रीलंका में अवसरों की समीक्षा हेडर वाली रिपोर्ट
- अलग अलग क्षेत्रों की गोपनीय परफॉर्मेंस रिपोर्ट
- मिनिस्ट्री ऑफ पीएनजी के एक्स्पलोरेशन डिवीजन के गोपनीय दस्तावेज शामिल हैं.

ये तमाम दस्तावेज बिचौलिये राकेश से बरामद हुए हैं. अब तक इस मामले में कुल 12 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. जिनमें रिलायंस और एस्सार समेत कई बड़े कॉरपोरेट समूहों के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं.

शुक्रवार को हुईं ये 5 बड़ी गिरफ्तारियां
- एडीएजी रिलायंस के डीजीएम ऋषि आनंद
- केयर्न्स इंडिया से के के नायक
- जुबीलेंट एनर्जी के सुभाष चंद्रा
- एस्सार के विनय कुमार
- RIL के मैनेजर शैलेश सक्सेना

आरोपियों के पास से दिल्ली पुलिस को तीन डायरी भी मिली हैं. जिनमें भारत सरकार के कई बड़े अधिकारियों के नंबर हैं. मामले की परतें खंगालने में जुटी दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम शुक्रवार को आरोपियों को साथ लेकर शास्त्री भवन पहुंची और जासूसी की पूरा रिक्रिएशन करवाया गया.

पता लगा है कि आरोपी अहम दस्तावेज चुराने के लिए फर्जी गेटपास और आईकार्ड का इस्तेमाल करते थे. शास्त्री भवन के दफ्तरों की 11 डुप्लीकेट चाबियां बनाई गई थी. दफ्तर में लगे सीसीटीवी कैमरों को चोरी के वक्त बंद कर दिया जाता था.

इतना तो पुलिस भी समझ चुकी है कि जिन आरोपियों तक अभी तक उसके हाथ पहुंचे हैं, वे तो सिर्फ मोहरे हैं. जबकि सरकार के भीतर चल रही जासूसों की सरकार का समंदर बेहद गहरा है, जिसमें मगरमछों तक पहुंचने की चुनौती उसके सामने है.

फिलहाल जहां गिरफ्तार आरोपियों से दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच पूछताछ कर जासूसों के जाल को तोड़ने की कोशिश में लगी है.वहीं कानून विशेषज्ञों से मशविरा भी ले रही है ताकि सीआरपीसी के अलावा ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत भी आरोपियों को दोषी ठहराया जा सके.

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